निर्जला अनशन पर बैठे JLKM विधायक जयराम महतो - realtimes
मौसम डेटा स्रोत: रायपुर मौसम
national

निर्जला अनशन पर बैठे JLKM विधायक जयराम महतो

रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही धांधली के खिलाफ छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र पिछले 16 दिनों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया है। इस बीच, डुमरी से विधायक और JLKM प्रमुख जयराम महतो ने छात्रों के समर्थन में मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने विधानसभा परिसर के बाहर एकदिवसीय निर्जला अनशन शुरू कर दिया है। इस दौरान वे अन्न-जल का त्याग कर विरोध जता रहे हैं और राज्य के सभी वर्गों से छात्रों के समर्थन की अपील की है।

परीक्षाओं में धांधली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

विधायक जयराम महतो ने राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि झारखंड की जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) जैसी परीक्षाओं में लगातार बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षाओं में सीटें बेची जा रही हैं, घरों के भीतर आंसर शीट लिखी जा रही हैं और ओएमआर (OMR) शीट खाली छोड़कर उन्हें बाद में भरा जा रहा है। इन तमाम भ्रष्टाचार के मामलों के खिलाफ छात्र लंबे समय से सड़क पर हैं।

समाज के हर वर्ग से समर्थन की अपील

छात्रों के इस आंदोलन को और तेज करने के लिए जयराम महतो ने राज्य के सभी वर्गों से आगे आने की अपील की है। उन्होंने मजदूर संगठनों, वकीलों, व्यवसायियों और किसानों से आग्रह किया है कि वे अपने-अपने स्तर पर कुछ समय के लिए छात्रों के समर्थन में कार्यक्रम आयोजित करें या अनशन पर बैठें। उनके पार्टी के एक अन्य नेता देवेंद्र नाथ महतो भी पिछले कई दिनों से अनशन पर डटे हुए हैं, जिससे यह विरोध प्रदर्शन अब और व्यापक होता जा रहा है।

सरकार के साथ हुई वार्ता रही बेनतीजा, जारी रहेगा आंदोलन

छात्र आंदोलन को थामने के लिए शनिवार को हेमंत सोरेन सरकार की तरफ से बड़ी पहल की गई थी। सरकार द्वारा गठित पांच सदस्यीय मंत्रिमंडलीय समिति (Ministerial Committee) और आंदोलनकारी छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच लंबी बातचीत हुई, लेकिन यह बैठक पूरी तरह बेनतीजा साबित हुई। सरकार की ओर से कोई ठोस समाधान या आश्वासन न मिलने के बाद प्रदर्शनकारियों ने दो टूक कह दिया है कि जब तक उनकी सभी शर्तें और मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक यह आंदोलन किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होगा।

Related Articles

Back to top button