वेयर हाउसिंग के ठेके में अपात्र कैसे बना पात्र

गोदाम काम्पलेक्स बनाने का मामला
रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ स्टेट वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के प्रधान कार्यालय से निकला घोटाले का यह नया मामला अब सरकार की टेबल पर जांच के इंतजार में रखा है। पहले ही अनाज के घोटालों के लिए अभिशप्त यह राज्य इस बार अनाज रखने के गोदाम बनाने में खुले फर्जीवाड़े का है। प्रारंभिक रूप से मामले में दो तीन मंझाले से नीचे कद के अधिकारी सजा के पात्र बनाए जा सकते हैं,क्योंकि इन्होंने ही अपात्र ठेकेदार को पात्र बनाकर ठेका दिलवाया। केवल गोदाम नहीं,गोदाम कॉम्प्लेक्स का निर्माण।
ये है मामलास्टेट वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन का यह मामला है। कार्पोरेशन ने सक्ती बारद्वार में 13 करोड़ से अधिक का ठेका एक फर्म अरोरा कंस्ट्रक्शन बिलासपुर को पांच प्रतिशत से अधिक बिलो रेट पर 12 करोड़ 41 लाख में दिया। टेंडर के लिए आवश्यक टर्न ओवर न होने के बाद भी अपात्र को ठेका दिया गया। ठेकेदार को पात्र बताया टेक्निकल कमेटी के पांच अधिकारियों ने, इनकी अनुशंसा को तत्कालीन एमडी ने अनुमोदित किया। इसके बाद टेक्निकल कमेटी के पदेन अध्यक्ष ने मंजूरी दी। कुल मिला कर यह गड़बड़ी त्रिस्तरीय मानी जा रही है। जमीन पर निचले स्तर के अधिकारी। टेबिल पर बड़े अधिकारी और उससे भी उपर बैठे अंतिम निर्णय लेने वाले तक के नाम चर्चा में हैं।
यह मामला महालेखाकार की पकड़ में आ गया है।अब फाईल मंगाई गईइस मामले में खाद्य विभाग ने संबंधित मामले की फाईल बुलाई है। यह फाईल सरकार की टीएल मीटिंग में रखी जानी है। लेकिन सूत्रों के अनुसार मूल फाईल के स्थान पर फोटो कापी पेश करने की तैयारी है। दिलचस्प ये है कि मामला विभिन्न स्तरों पर शिकायत के रूप में उपलब्ध है। जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।



