जमीन के नामांतरण-सीमांकन में अब कम होगी भागदौड़, डिजिटल व्यवस्था से राहत

रायपुर। राजस्व विभाग से जुड़े काम लंबे समय तक आम लोगों के लिए परेशानी का कारण रहे हैं। भूमि नामांतरण, सीमांकन और नक्शों से जुड़े मामलों में देरी के कारण जमीन मालिकों को राजस्व कार्यालयों और न्यायालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। इससे समय और धन खर्च होने के साथ पारिवारिक संपत्तियों को लेकर विवाद और अनिश्चितता भी बनी रहती थी।
राज्य सरकार ने इन समस्याओं को कम करने के लिए छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इनका उद्देश्य राजस्व प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है। सबसे अहम बदलाव स्वतः ई-नामांतरण की व्यवस्था है। धारा 110 में किए गए संशोधनों के तहत पंजीयन विभाग को नामांतरण की प्रक्रिया से जोड़ा गया है। इससे रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया आसान हुई है।
व्यवस्था के तहत जमीन मालिक अपने जीवनकाल में ही कानूनी वारिसों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज करा सकते हैं। इससे भविष्य में उत्तराधिकार को लेकर होने वाले विवादों की संभावना कम करने में मदद मिलेगी।
राजस्व मामलों के डिजिटलीकरण से नोटिस और अन्य आधिकारिक सूचनाएं भी डिजिटल माध्यम से भेजी जा रही हैं। धारा 33 के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म को कानूनी मान्यता मिलने से संबंधित लोगों तक सूचना समय पर पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत हुई है। वहीं धारा 30 के तहत राजस्व न्यायालयों में अभिलेखों, प्रकरणों और फाइलों के डिजिटल प्रेषण से मामलों के निपटारे में तेजी लाने का प्रयास किया गया है।
भूमि सीमांकन और नक्शों से जुड़े विवादों में भी जिओ-रेफरेंस्ड नक्शों को महत्व दिया गया है। धारा 107 के तहत अधिसूचित ऐसे नक्शों से भूमि की स्थिति और सीमाओं की पहचान अधिक स्पष्ट तरीके से की जा सकती है। वहीं धारा 70 के प्रावधानों के जरिए कृषि जोत के अनावश्यक विखंडन पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है।
इन सुधारों से राजस्व सेवाओं को घर बैठे और डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की दिशा में बदलाव आया है। इससे नागरिकों के समय, धन और अनावश्यक भागदौड़ को कम करने में मदद मिल रही है।



