TMC के दोनों गुटों की नई पहचान तय, एक को फुटबॉल तो दूसरे को लिफाफा - realtimes
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TMC के दोनों गुटों की नई पहचान तय, एक को फुटबॉल तो दूसरे को लिफाफा

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों को चुनाव आयोग ने नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं। ममता बनर्जी गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न मिला है। वहीं अरूप रॉय गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था आगामी उपचुनावों के लिए लागू की गई है।

इससे पहले चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया था। आयोग ने दोनों पक्षों से नए नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प मांगे थे।

ममता गुट के उम्मीदवार किस नाम से लड़ेंगे?

चुनाव आयोग के आदेश के मुताबिक, ममता बनर्जी की ओर से अधिकृत फॉर्म-बी के तहत दाखिल नामांकन पत्रों को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ के उम्मीदवार के रूप में मान्यता दी जाएगी।

इन उम्मीदवारों में रबीउल आलम चौधरी, नंदीग्राम से संचिता प्रधान (डे) और असम की नगांव लोकसभा सीट से अब्दुल सलाम शामिल हैं।

इन उम्मीदवारों को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। आयोग के आदेश के अनुसार, यह आवंटन लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 36 के तहत लागू वैधानिक प्रावधानों के अधीन रहेगा।

अरूप रॉय गुट को मिला ‘लिफाफा’ सिंबल

दूसरी ओर, अरूप रॉय द्वारा अधिकृत फॉर्म-बी के आधार पर नामांकन दाखिल करने वाले उम्मीदवारों को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ का उम्मीदवार माना जाएगा।

इसके तहत सफिउज्जमान शेख और नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से एहतेशमुल हक के नामांकन को ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न वाले उम्मीदवार के तौर पर दर्ज किया जाएगा।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था सभी वैधानिक आवश्यकताओं की पूर्ति होने पर ही लागू होगी।

रिटर्निंग अफसरों को आदेश का पालन करने का निर्देश

चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की 70-रेजीनगर और 210-नंदीग्राम विधानसभा सीटों के साथ असम की 9-नगांव लोकसभा सीट के रिटर्निंग अफसरों को आदेश का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है।

आयोग के सचिव अश्वनी कुमार मोहाल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के दौरान उनकी वैधता लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 36 के तहत जांची जाएगी।

इस तरह आगामी चुनावी प्रक्रिया में दोनों गुट अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के साथ मैदान में होंगे। दोनों पक्षों के बीच मूल पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद पर चुनाव आयोग की यह व्यवस्था फिलहाल संबंधित उपचुनावों के लिए है।

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