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डिजिटल मीडिया पर अंकुश लगाने की तैयारी में मोदी सरकार! नया विधेयक पेश करने की योजना, जानें क्या है इसका मतलब

विधेयक के मसौदे में क्या है?

केंद्र सरकार ने साल 2019 में प्रेस और आवधिक विधेयक के पंजीकरण का मसौदा तैयार किया था। इस विधेयक में ‘डिजिटल मीडिया पर समाचार’ को ‘डिजिटल प्रारूप में समाचार’ के रूप में परिभाषित किया गया था, जिसे इंटरनेट, कंप्यूटर या मोबाइल नेटवर्क पर प्रसारित किया जा सकता है और इसमें टेक्स्ट, ऑडियो, वीडियो और ग्राफिक्स शामिल हैं। उस समय सरकार द्वारा लाए गए मौसेद पर काफी बहस भी हुई थी और इसका विरोध भी जताया गया था।

मसौदा विधेयक में उन्हीं लोगों को प्रकाशन का अधिकार दिया गया है, जिन्हें आतंकवादी अधिनियम या गैरकानूनी गतिविधि से जुड़े अपराध या ‘राज्य की सुरक्षा के खिलाफ कुछ भी करने’ के लिए किसी भी अदालत द्वारा दोषी नहीं ठहराया गया।

मसौदे में कहा गया है कि ‘आतंकवादी अधिनियम’ या ‘गैरकानूनी गतिविधि’ को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (के) और (ओ) के अनुसार परिभाषित किया जाएगा। प्रस्तावित मसौदा मजिस्ट्रेट जैसे स्थानीय अधिकारियों को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने या कानून के प्रावधानों के उल्लंघन के कारण उपकरण जब्त करने की शक्तियां नहीं देता है।

नए विधेयक में प्रेस रजिस्ट्रार की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है जिसके पास कानून में उल्लंघन पाने पर प्रकाशन के पंजीकरण को रद्द करने अधिकार होगा। ‘ई-पेपर के पंजीकरण की सरल प्रणाली’ का प्रस्ताव रखते हुए मसौदा विधेयक यह भी कहता है कि ‘प्रेस रजिस्ट्रार जनरल’ द्वारा समय-समय पर समाचार पत्रों के साथ पत्रिकाओं के भी शीर्षक और पंजीकरण की प्रक्रिया को तय किया जाएगा।

इसका मुख्य नियंत्रक प्राधिकारी प्रेस रजिस्ट्रार जनरल होगा जिसे समाचार पत्रों और पत्रिकाओं का सालाना लेखा-जोखा मंगाने, अखबारों के प्रसार की पुष्टि करने और पत्रिकाओं के पंजीकरण को संशोधित करने, रद्द करने या निलंबित करने का अधिकार होगा। इस अधिकारी के पास जुर्माना लगाने और दंड देने का भी अधिकार होगा।

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