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बिहार में सीबीआई की सीधी एंट्री पर रोक

बिहार सरकार ने राज्य के कर्मचारियों और सरकारी नियंत्रण वाली संस्थाओं से जुड़े मामलों में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की सीधी कार्रवाई पर रोक लगाते हुए केस-दर-केस मंजूरी अनिवार्य कर दी है। दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (DSPE) एक्ट, 1946 की धारा 6 के तहत लिए गए इस फैसले के बाद बिहार देश का 8वां ऐसा राज्य बन गया है, जहां सीबीआई से सामान्य सहमति (General Consent) वापस ले ली गई है। अब सीबीआई को बिहार के किसी भी राज्य कर्मचारी के खिलाफ जांच शुरू करने से पहले राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी, हालांकि केंद्रीय कर्मचारियों और निजी मामलों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।

विजिलेंस कार्रवाई और सीबीआई की नई सीमाएं

पिछले 20 वर्षों में बिहार के निगरानी अन्वेषण विभाग ने भ्रष्टाचार के मामलों में 5,136 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिनमें सबसे ज्यादा शिकायतें और कार्रवाई शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज हुईं। नए फैसले के तहत सीबीआई केंद्र सरकार के कर्मचारियों पर जांच और रेड जारी रख सकती है, लेकिन राज्य सरकार के कर्मचारियों से जुड़े मामलों में बिना लिखित मंजूरी के कदम नहीं उठा सकेगी। इसके अलावा, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पास किसी भी मामले की सीबीआई जांच का आदेश देने का अधिकार पहले की तरह बना रहेगा।

बिना सामान्य सहमति वाले 8 राज्य और NCRB के आंकड़े

सीबीआई से सामान्य सहमति वापस लेने वाले राज्यों में अब बिहार के साथ झारखंड, पंजाब, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और मेघालय शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट भी स्पष्ट कर चुका है कि राज्यों के अधिकार क्षेत्र में सीबीआई जांच के लिए DSPE एक्ट की धारा 6 के तहत राज्य की अनुमति जरूरी है। वर्ष 2024 के एनसीआरबी (NCRB) आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र 724 मामलों के साथ भ्रष्टाचार में शीर्ष पर रहा, जबकि तमिलनाडु में 364, कर्नाटक में 334, पंजाब में 280 और बिहार में 124 मामले दर्ज हुए।

संविधान, संघीय ढांचा और राज्य एजेंसियों की भूमिका

संविधान में पुलिस और पब्लिक ऑर्डर राज्य सूची का विषय होने के कारण केंद्रीय जांच एजेंसियों का दायरा सीधे केंद्र-राज्य संबंधों और संघीय ढांचे से जुड़ जाता है। सामान्य सहमति खत्म होने से राज्यों की अपनी एजेंसियों की भूमिका बढ़ जाती है, जैसे तमिलनाडु में DVAC, कर्नाटक में लोकायुक्त व ACB व्यवस्था और पंजाब में विजिलेंस। हालांकि, यदि मामला केंद्रीय कर्मचारी, केंद्रीय योजना या केंद्र-राज्य दोनों के साझा अधिकारियों से जुड़ा हो, तो जांच की जिम्मेदारी किस एजेंसी के पास जाएगी, यह सवाल अभी भी बना हुआ है।

भविष्य के तीन अहम सवाल और संभावित असर

इस फैसले के बाद आने वाले समय में तीन सवाल सबसे महत्वपूर्ण रहेंगे। पहला, क्या राज्य सरकार हर मामले में सीबीआई को जांच की मंजूरी देगी या चुनिंदा मामलों में रोक लगाएगी? दूसरा, केंद्र और राज्य के बीच विवाद बढ़ा तो क्या अदालतें इसमें दखल देंगी? और तीसरा, क्या दूसरे राज्य भी सीबीआई की सामान्य सहमति खत्म करने का रास्ता अपनाएंगे? इसका असर यह हो सकता है कि कुछ मामलों में सीबीआई जांच की रफ्तार राज्य सरकार की मंजूरी पर निर्भर हो जाए।

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