झारखंड CGL और CDPO भर्ती रद्द करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की CDPO नियुक्ति परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत के इस आदेश से CGL के जरिए विभिन्न विभागों में नियुक्त 1,932 कर्मचारियों और 64 नवनियुक्त CDPO को फिलहाल राहत मिल गई है। दोनों परीक्षाएं रद्द होने के बाद इनकी नियुक्तियां खत्म हो गई थीं।
सरकार से पूछा- इतनी बड़ी कार्रवाई का आधार क्या?
सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार के फैसले को नैसर्गिक न्याय के खिलाफ माना। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि CID की जांच में ऐसा क्या सामने आया, जिसके आधार पर इतनी बड़ी संख्या में नियुक्तियों और संबंधित विज्ञापनों को रद्द करने का फैसला लिया गया।
अदालत ने सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि इतनी बड़ी कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ी और इसके पीछे ठोस आधार क्या था। सरकार को 7 सितंबर तक शपथपत्र के जरिए अपना जवाब दाखिल करना होगा। याचिकाकर्ताओं को सरकार के जवाब पर 14 सितंबर तक अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
कोर्ट ने कहा- मामले की तेजी से होगी सुनवाई
अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए इसकी सुनवाई तेजी से पूरी करने की बात कही है। कोर्ट ने कहा कि मामले में जल्द फैसला सुनाने का प्रयास किया जाएगा। राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं को तय समय सीमा में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
इससे पहले गुरुवार को हाईकोर्ट ने JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी नियुक्ति परीक्षा रद्द करने के आदेश पर भी रोक लगाई थी।
बिना पक्ष सुने नियुक्ति रद्द करने पर सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने अदालत में कहा कि CGL से नियुक्त कर्मचारियों को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। उनका कहना था कि इन कर्मचारियों की नियमित नियुक्ति हुई है। ऐसे में बिना उनका पक्ष सुने नियुक्ति रद्द करना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।
अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें नियुक्तियों को अंतिम परिणाम से प्रभावित होने की बात कही गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जांच में ऐसा कौन सा तथ्य सामने आया, जिसके आधार पर सभी चयनित अभ्यर्थियों को गड़बड़ी से जोड़ दिया गया।
सरकार ने कहा- जवाब देने का पर्याप्त मौका मिले
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाएं हाल ही में दाखिल हुई हैं और मामले की तत्काल सुनवाई हो रही है। सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। सरकार ने अदालत से अपना जवाब दाखिल करने का उचित अवसर देने का आग्रह किया।
इस पर अदालत ने कहा कि पूरे मामले के तथ्यों को देखकर ही फैसला लिया जाएगा। कोर्ट ने सरकार को शपथपत्र के जरिए अपना पक्ष रखने का मौका दिया है। सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्य राय ने पक्ष रखा।
नियुक्ति नहीं हुई तो रद्द परीक्षाओं पर 24 अगस्त को सुनवाई
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से रद्द की गई उन JPSC परीक्षाओं से जुड़ी सभी याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है, जिनके आधार पर अभी तक नियुक्तियां नहीं हुई हैं। इन मामलों पर 24 अगस्त को सुनवाई होगी।
सुनवाई के दौरान सहायक वन संरक्षक की नियुक्ति से जुड़े विज्ञापन को रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर भी जल्द सुनवाई का आग्रह किया गया। अदालत ने कहा कि इस विज्ञापन के आधार पर अभी नियुक्ति नहीं हुई है। इसलिए इसे भी इसी श्रेणी के मामलों के साथ सूचीबद्ध किया जाए।
क्या है पूरा मामला?
राज्य में हुई विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों की CID जांच के बाद सरकार ने 17 अगस्त को विशेष कैबिनेट बैठक की थी। बैठक में लिए गए फैसले के आधार पर 18 अगस्त को CGL समेत कुल 22 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने की अधिसूचना जारी की गई।
सरकार के मुताबिक, CID जांच में कुछ परीक्षाओं में गड़बड़ी के तथ्य सामने आए थे। कुछ मामलों में टीडीपीएल एजेंसी की भूमिका की भी जांच में जानकारी मिली थी। इसके अलावा 2014 से आयोजित नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं को लेकर भी CID जांच के आदेश दिए गए।
सरकार ने कुल 22 परीक्षाएं रद्द करने, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया रोकने और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने का फैसला किया था। रद्द की गई 22 परीक्षाओं में से 4 में नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।



