
सुप्रीम कोर्ट ने 10 फरवरी को सुनवाई टालते हुए माल्या को पक्ष रखने का अंतिम मौका दिया था। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा था कि अगर अगली सुनवाई में दोषी पेश नहीं होता या अपने वकील के जरिए पक्ष नहीं रखता तो सजा को लेकर कार्रवाई नहीं रोकी जाएगी। दरअसल, उसे डिएगो डील के 40 मिलियन डॉलर अपने बच्चों के विदेशी एकाउंट में ट्रांसफर करने और सम्पत्ति का सही ब्यौरा न देने के लिए अवमानना का दोषी करार दिया गया था।
बता दें, माल्या कुछ कानूनी दांवपेंच अपना कर यूनाइटेड किंगडम में है। उसने वहां कोई गुप्त कानूनी प्रक्रिया शुरू कर ली है। जानकारी के मुताबिक, यूके की सरकार ने न तो इस प्रक्रिया में भारत सरकार को पक्ष बनाया है न उसकी जानकारी साझा की है। इस कारण माल्या को अब तक भारत नहीं लाया जा सका है।


