सर्व आदिवासी समाज की राजभवन घेरने की तैयारी

रायपुर(realtimes) संशोधित आरक्षण विधेयक पर अब तक राज्यपाल के हस्ताक्षर न होने के कारण सर्व आदिवासी समाज में भारी नाराजगी है। समाज ने इस मामले को लेकर राज्यपाल को तीन दिनों का अल्टीमेटम दे दिया है। अगर इस बीच विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं हुए तो 27 दिसंबर को राजभवन का घेराव किया जाएगा। घेराव कार्यक्रम में प्रदेशभर के हजारों आदिवासी शामिल होंगे।
छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के युवा प्रभाग के अध्यक्ष कुंदन सिंह ठाकुर ने बताया, आदिवासी हितों को ध्यान में रखते हुए संशोधित विधेयक पर राज्यपाल से हस्ताक्षर करने की मांग हमने की है। उन्होंने बताया, 2012 से लागू आरक्षण नियम को उच्चतम न्यायलय, बिलासपुर द्वारा 19 सितंबर 2022 को समाप्त कर दिया गया है, जिसके कारण भर्तियों में आदिवासियों को मिलने वाला 32 प्रतिशत का आरक्षण खत्म हो गया है। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज द्वारा राज्य में आदिवासियों के लिए फिर 32 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से भेंट कर तत्काल आरक्षण बहाली की मांग की गई।
इसके बाद विधानसभा में संशोधन विधेयक लाया गया। 32 प्रतिशत आरक्षण के लिए राज्यपाल ने भी कहा, छत्तीसगढ़ विधानसभा में जैसे ही विधेयक संकल्प पारित होगा तो मैं तत्काल अनुमोदन कर दूंगी। फलस्वरूप मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तत्परता दिखाते हुए छत्तीसगढ़ में आरक्षण का नया नियम बनाने के लिए छत्तीसगढ़ विधानसभा में 2 दिसंबर 2022 को विशेष सत्र बुलाकर सर्वसम्मति से संकल्प पारित किया। राज्यपाल के कथनानुसार उसी दिन छत्तीसगढ़ शासन के वरिष्ठ मंत्री अनुमोदन के लिए राजभवन गए, लेकिन राज्यपाल द्वारा उक्त आरक्षण संकल्पपत्र पर अनुमोदन के लिए हस्ताक्षर नहीं किया गया और समाचार पत्रों के माध्यम से यह पता चला कि राज्यपाल कानून के जानकारों से सलाह लेकर हस्ताक्षर करेंगी।
राज्यपाल के विलंब के कारण उच्चतम न्यायालय बिलासपुर द्वारा पुराने आरक्षण नियम के हिसाब से विभिन्न उपक्रमों में भर्ती किए जाने के लिए आदेश जारी किया गया है, जिसके कारण आदिवासी समाज को आरक्षण के संबंध में बहुत भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा। अनावश्यक विलंब के कारण आदिवासी समाज बहुत आक्रोशित है, आंदोलित है और अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।



