मृत किसानों के नाम पर करोड़ों की बंदरबांट,11 हजार संदिग्ध खाते ब्लॉक

- मृत और अपात्र किसानों को वर्षों तक मिलती रही सरकारी राशि
- 2,163 मृत किसानों के खातों में पहुंचती रही राशि
- वसूली की तैयारी शुर
रायपुर। छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत एक बड़ा फजीर्वाड़ा उजागर हुआ है, जिसने प्रशासनिक निगरानी और सत्यापन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भौतिक सत्यापन के दौरान सामने आया कि जिले में 2,163 मृत किसानों के नाम पर वर्षों तक योजना की राशि उनके बैंक खातों में भेजी जाती रही।
प्रारंभिक जांच में 1,310 ऐसे किसानों की पहचान की गई है, जो योजना के नियमों के तहत अपात्र थे, लेकिन इसके बावजूद वे लाभ लेते रहे। कृषि विभाग के अधिकारियों ने इन सभी अपात्र लाभार्थियों के नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और सूची राज्य मुख्यालय को भेज दी गई है। साथ ही, इन संदिग्ध खातों को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक कर दिया गया है।
अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में किसानों की मृत्यु के बाद उनके परिजनों ने विभाग को इसकी सूचना नहीं दी और योजना की राशि लेना जारी रखा। यह भी सामने आया है कि वर्षों तक न तो विभाग ने नियमित सत्यापन किया और न ही डेटा अपडेट किया गया, जिससे इस तरह की गड़बड़ियों को बढ़ावा मिला।
अप्रैल 2026 के मध्य में शुरू किए गए भौतिक सत्यापन अभियान के दौरान अब तक 11,000 से अधिक संदिग्ध खातों की पहचान की जा चुकी है। प्रशासन ने इन खातों को ब्लॉक कर दिया है और अपात्र लाभार्थियों से राशि की वसूली के लिए रिकवरी नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।
रायपुर जिले में इस योजना के तहत कुल 92,518 किसान पंजीकृत हैं। हाल ही में जारी 22वीं किस्त के अंतर्गत किसानों के खातों में 18.71 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। इसी भुगतान के बाद जब आंकड़ों की जांच की गई, तो इस बड़े फजीर्वाड़े का खुलासा हुआ। इस मामले का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है, जिसमें कई पात्र किसानों को योजना की राशि नहीं मिल पाई है। रीको गांव के ओमप्रकाश यदु, रामचरण पटेल, दीनानाथ साहू, चितरेखा साहू और रजनीकांत बंजारे जैसे किसानों ने शिकायत दर्ज कराई है कि वे पात्र सूची में शामिल होने के बावजूद इस बार किस्त से वंचित रह गए।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत भी प्रदेश में करीब 10 प्रतिशत लाभार्थियों को वर्ष 2026 की किस्त अब तक नहीं मिल सकी है, जबकि वे पात्र हैं और उनका पंजीयन भी पूरा है।
कृषि विभाग का कहना है कि डेटा में सुधार के लिए ‘करेक्शन मॉड्यूल’ का उपयोग किया जा रहा है, ताकि भविष्य में केवल वास्तविक और पात्र किसानों को ही योजना का लाभ मिल सके। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मृत या अपात्र किसानों के परिजनों से गलत तरीके से ली गई राशि की वसूली की जाएगी। यह पूरा मामला प्रशासनिक लापरवाही, डेटा प्रबंधन की कमजोरी और निगरानी तंत्र की खामियों को उजागर करता है। अब देखना होगा कि जांच और वसूली की प्रक्रिया कितनी प्रभावी साबित होती है और क्या भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकेगी।



