बिजली उभोक्ताओं को अब सुरक्षा निधि का बड़ा करंट

रायपुर(realtimes) राज्य में बिजली की महंगाई भी थमने का नाम नहीं ले रही है। लगातार एक के बाद एक झटके लग रहे हैं। एक झटके से उबरे बिना ही दूसरा झटक लग जा रहा है। प्रदेश भर के बिजली उपभोक्ताओं को अक्टूबर माह के बिल में तगड़ा करंट लगा है। एक तो वीसीए में 19 पैसों का इजाफा हुआ, दूसरा विद्युत शुल्क में बढ़ा है और तीसरा इसी माह के बिल में सुरक्षा निधि काे भी जोड़ दिया गया है। खपत के हिसाब से अलग-अलग उपभोक्ताओं का एक से दस हजार तक का बिल ज्यादा आया है। जिनकी खपत में बदलाव नहीं हुआ है या फिर उनकी सुरक्षा निधि पहले से ही ज्यादा जमा है, उनको राहत है, उनको अतिरिक्त सुरक्षा निधि नहीं देनी पड़ रही है।
प्रदेश में 65 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। हर वर्ग के बिजली उपभोक्ताओं की बिजली की खपत का साल में एक बार आकलन करके औसत निकाला जाता है। जिनका औसत बढ़ जाता है, उनकी पहले से जमा सुरक्षा निधि से अतिरिक्त सुरक्षा निधि ली जाती है। इसकी गणना इस तरह से होती है कि दो माह के बिल के बराबर राशि सुरक्षा निधि में होनी चाहिए। पहले से जमा राशि में से जो अंतर आता है, उसको बिल में जोड़ा जाता है। यही वजह है कि अक्टूबर के बिल में सुरक्षा निधि जुड़ने से भारी भरकम बिल ने सबके होश उड़ा दिए हैं।
एक साथ तीन झटके
अक्टूबर के बिल में एक साथ तीन झटके लगने के कारण उपभोक्ता परेशान हो गए हैं। वीसीए में 19 पैसों के इजाफा के साथ इस माह वीसीए 61 पैसे प्रति यूनिट हो गया है। इसी के साथ घेरलु उपभोक्ता का विद्युत शुल्क 8 से बढ़कर 11 और गैर घरेलु उपभोक्ताओं का 12 से 17 प्रतिशत हो गया है। इसके बाद सुरक्षा निधि भी जुड़ी है। किसी उपभोक्ता को पांच सौ, किसी को सात सौ किसी को हजार किसी को तीन से पांच हजार तो जिनकी खपत ज्यादा है उनके बिलों में दस हजार भी सुरक्षा निधि के जुड़े हैं।
गणना में गलती भी
सुरक्षा की निधि की गणना में मनमर्जी की बात भी की जा रही है। जिनके पहले से सुरक्षा निधि के पैसे जमा हैं, उनकी औसत खपत ज्यादा न बढ़ने के बाद भी उनके बिलों में हजार से 12 सौ रुपए सुरक्षा निधि के जुड़ गए हैं, जबकि पुरानी सुरक्षा निधि को देखते हुए ये पांच से छह सौ होने चाहिए। इसी तरह से सैकड़ों उपभोक्ताओं की गणना में गलती होने के कारण उनको ज्यादा फटका लग रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है, अभी तो दीपावली के खर्च से उबरे भी नहीं हैं और ये बिजली बिलों में बड़ा झटका लगने से बजट गड़बड़ा गया है।



