पीसीसी प्रेसीडेंट पर कांग्रेस में घमासान, प्रियंका का बस्तर दाैरा खिलाएगा गुल

काैन कह रहा है-जब सब कुछ ठीक तो अध्यक्ष बदलने की जरुरत ही क्या
रायपुर( realtimes) छत्तीसगढ़ में पीसीसी प्रेसीडेंट के चयन को लेकर कांग्रेस के अंदर खाने में जबरदस्त हलचल है। प्रदेश अध्यक्ष पद की दावेदारी में अहम ये नहीं कि काैन सा नाम चुना जाएगा। दरअसल ये देखा जाएगा कि किसकी पसंद का अध्यक्ष चुना जाएगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस दाैड़ का नेतृत्व कर रहे हैं,तो पार्टी का सिंहदेव खेमा सामने हैं।
राजनीतिक प्रेक्षकों की मानें तो अब तक की रस्साकशी में कांग्रेस सरकार के सत्तापक्ष और कांग्रेस सरकार के विपक्ष की लड़ाई खुले रूप में सामने हैं। सत्ताधारी पक्ष ने सांसद दीपक बैज का नाम बढ़ाया है। निवृतमान हो रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम बदले गए तो उनकी जगह कोई आदिवासी नेता ही होगा, ये तय माना जा रहा है। खास बात ये है कि मरकाम बस्तर कोंडागांव से हैं तो सांसद दीपक बैज भी बस्तर से ही है। इसी बस्तर क्षेत्र में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बस्तर दौरे को क्या पीसीसी प्रेसिडेंट के चयन से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
फरवरी के बाद दूसरा दाैरा
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी फरवरी में कांग्रेस के रायपुर महाधिवेशन में शामिल होने आईं थी तब ये उनका पहला छत्तीसगढ़ दाैरा था। अप्रैल में दूसरी बार उनके आने पर जाहिर है राज्य की सियासत के बड़े दांव चले जाएंगे। प्रेक्षकों का मानना है कि इतने कम समय में प्रियंका का दूसरी बार छत्तीसगढ़ आगमन कोई गुल खिलाएगा। बस्तर में प्रियंका गांधी को बताया जाएगा कि ये वही बस्तर हैं जहां की सारी विधानसभी सीटें कांग्रेस ने 2018 और उसके बाद के उपचुनावों में जीती है। 2019 में लोकसभा चुनाव में मोदी की आंधी के बीच दीपक बैज यहां की लोकसभा सीट जीतकर आए। इसी क्षेत्र में कांग्रेस ने उद्योग के लिए ली गई किसानों की जमीनें वापस लौटकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया और बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। इसकी वजह से बस्तर में कांग्रेस का जनाधार लाैटा है। इसकी पृष्ठभूमि में कहीं न कहीं बैज का चेहरा सामने रखा जाएगा। जाहिर है उनकी दावेदारी प्रबल और सफल होने की संभावना है।
दूसरे पक्ष का पक्ष
कांग्रेस का दूसरा खेमा मोहन मरकाम को बनाए रखने की दलील पर कायम है। उनका कहना है कि अगर सब कुछ ठीक चल रहा है तो मरकाम को हटाने की जरुरत ही क्या है। दलील ये भी है कि इस बार 75 सीट जीतने का दावा किया जा रहा है इसका मतलब ही यही कि सब कुछ ठीक चल रहा है और पार्टी लक्ष्य की ओर बढ़ रही है तो भी मरकाम को बने रहने देना चाहिए.बदलाव की जरुरत ही क्या है। बहरहाल प्रियंका गांधी का 13 अप्रैल को बस्तर आगमन का कार्यक्रम मुख्यमंत्री के अत्यंत करीब नेता ने जारी कर दिया है। उनकी सक्रियता से पीसीसी प्रेसीडेंट के चयन की राजनीति जुड़ी दिख रही है।



