नए साल में ही लग पाएंगे छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर

रायपुर(realtimes) राजधानी रायपुर के साथ ही रायपुर संभाग और उसके बाद छत्तीसगढ़ के सभी जिलाें में लगने वाले में स्मार्ट मीटरों का कम से कम इस साल लगना संभव नहीं है। हालांकि रायपुर संभाग के साथ ही बिलासपुर और अंबिकापुर संभाग का टेंडर फाइनल हो गया है। इसी के साथ दुर्ग, बस्तर और पावर कंपनी के राजनांदगांव संभाग को मिलाकर बनाए गए एक ग्रुप का 16 सौ करोड़ का री-टेंडर आज खुलना है, लेकिन अब भी एक ही निविदा के कारण इसकी तिथि आगे बढ़ेगी। इस टेंडर के भी फाइनल होने के बाद भी स्मार्ट मीटर इस साल किसी भी हाल में लगने प्रारंभ नहीं हो पाएंगे। मीटरों को लगाने से पहले कंट्रोल रूम बनाया जाना है। इसके लिए गुढ़ियारी में स्थान तो तय हो गया है और यहां पर भवन बनाने के लिए अब टेंडर करने की तैयारी है। ऐसे में इसके लिए लंबा समय लगेगा।
गुढ़ियारी में बनने वाले कंट्रोल रूम को तय किया गया है कि स्कॉडा वाली बिल्डिंग के पास में जो खाली जमीन है, उसमें नया भवन बनाकर कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। लेकिन इसी के साथ यह भी तय किया गया है कि टाटा कंपनी चाहे तो इस भवन के बनने से पहले वह स्कॉडा वाली बिल्डिंग में अपना अस्थाई सेटअप लगा सकती है। जहां नया भवन बनने में करीब साल भर का समय लग जाएगा, वहीं कंपनी ने अस्थाई कंट्रोल रूम बनाने का काम भी किया तो इसमें भी इतना ज्यादा समय लग जाएगा कि इस साल के अंत में जाकर यह पूरा हाेगा। यह साल चुनावी भी है, ऐसे में इस साल स्मार्ट मीटर लग ही नहीं पाएंगे।
टाटा कंपनी लगाएगी रायपुर संभाग में स्मार्ट मीटर
पावर कंपनी ने चार हजार करोड़ का काम होने के कारण तीन हिस्सों में टेंडर किया था। रायपुर संभाग बड़ा होने के कारण उसे अलग संभाग रखा गया और इसका टेंडर 16 सौ करोड़ का किया गया। इसका काम टाटा को मिल गया है। टाटा ने स्मार्ट मीटर लगाने के लिए सर्वे भी प्रारंभ कर दिया है। रायपुर में पहले सरकारी दफ्तरों में मीटर लगाए जाने हैं। दुर्ग संभाग के साथ बस्तर संभाग और पावर कंपनी के राजनांदगांव संभाग को मिलाया गया। इसका टेंडर भी 16 सौ करोड़ का किया गया था। इसमें रेट बीड एकमात्र अदाणी का होने के कारण इसका टेंडर रद्द कर दिया गया। इसका री-टेंडर किया गया, लेकिन लगातार तीन बार इसकी तिथि एक ही निविदा के कारण बढ़ानी पड़ी है। एक बार फिर से तिथि बढ़ने वाली है।



