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भारत में डोपिंग के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति: खेल मंत्री

नई दिल्ली। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ मनसुख मांडविया ने कहा है कि भारत खेलों की निष्पक्षता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए डोपिंग के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति पर काम कर रहा है।

खिलाड़ियों की जीत प्रतिभा, अनुशासन और मेहनत के आधार पर हो, इसके लिए जांच व्यवस्था को मजबूत करने के साथ जागरूकता और शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

डॉ मांडविया ने मंगलवार को नई दिल्ली में विश्व डोपिंग रोधी वैज्ञानिक संघ (डब्ल्यूएएडीएस) की गुणवत्ता आश्वासन प्रबंधकों की 10वीं बैठक में राष्ट्रीय डोप परीक्षण प्रयोगशाला (एनडीटीएल) की बाह्य अनुसंधान अनुदान नीति का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने एनडीटीएल के न्यूजलेटर का भी लोकार्पण किया।

खेल मंत्री ने कहा कि नई अनुसंधान अनुदान नीति का उद्देश्य डोपिंग का पता लगाने और उसकी रोकथाम के लिए उन्नत तकनीकों के विकास को प्रोत्साहित करना है।

इससे डोपिंग रोधी अभियान को वैज्ञानिक मजबूती मिलेगी और जांच की क्षमता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थों और सप्लीमेंट के इस्तेमाल से जुड़े जोखिमों की जानकारी देना भी उतना ही जरूरी है। प्रशिक्षकों और चिकित्सा विशेषज्ञों को भी डोपिंग रोधी नियमों के प्रति जागरूक होना चाहिए।

मांडविया ने कहा कि भारत 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है और 2036 ओलंपिक की मेजबानी का लक्ष्य भी रखता है। ऐसे में स्वच्छ खेल, प्रभावी डोपिंग जांच, खिलाड़ी शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग देश की प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

उन्होंने खेलो इंडिया, फिट इंडिया और टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों से देश का खेल तंत्र मजबूत हुआ है और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के अधिक अवसर मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में खेलों को राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण आधार के रूप में पहचान मिली है।

बैठक में खेल सचिव हरि रंजन राव, विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) के वरिष्ठ अधिकारी डॉ ओस्क्वेल बारोसो, डब्ल्यूएएडीएस की अध्यक्ष डॉ डोरोटा क्वियात्कोव्स्का और एनडीटीएल के निदेशक प्रो. पीएल साहू सहित कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि और वैज्ञानिक मौजूद रहे।

 

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