खास चुनावी खबर: हार का अब नहीं रहा टिकट से वास्ता, भाजपा ने खाेला हारे प्रत्याशियों के लिए भी रास्ता

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के लिए .यही कहा जा रहा था कि इस बार भाजपा का राष्ट्रीय संगठन हारने वालाें काे किसी भी कीमत पर टिकट नहीं देगा, इसी के साथ यह भी चर्चा आम थी कि जाे वर्तमान विधायक हैं, उनमें से भी ज्यादातर काे वापस प्रत्याशी नहीं जाएगा, लेकिन इस सब बाताें पर भाजपा की पहली सूची से ही विराम लग गया है। भाजपा हारे हुए प्रत्याशियों काे भी मैदान में उतारने काे तैयार है, बस शर्त यह कि उस प्रत्याशी में जीत का दम हाेना चाहिए।
इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने 21 प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है। इनमें पांच पुराने और 16 नए चेहरे हैं। इन प्रत्याशियों को देखने के बाद यह तय हो गया है कि भाजपा का राष्ट्रीय संगठन हारने वालों के साथ संगठन के पदाधिकारियों को भी मैदान में उतारने से परहेज नहीं करेगा। इसी के साथ नए और पुराने सांसदों को भी मैदान में उतारा जाएगा। भाजपा का एकमात्र मकसद जीतने की क्षमता रखने वालों को टिकट देने का है, फिर चाहे वह पहले के हारे हुए प्रत्याशी हों या फिर संगठन के पदाधिकारी ही क्यों न हों।
सत्ता में वापसी चाहती है भाजपा
भाजपा का राष्ट्रीय संगठन हर हाल में छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव जीतकर सत्ता में वापसी करना चाहता है। यही वजह है कि यहां पर अलग तरह की रणनीति के तहत काम किया जा रहा है। पहली बार आचार संहिता लगने से पहले ही 21 प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया गया है। इस माह एक दर्जन से ज्यादा और प्रत्याशियों का ऐलान करने की तैयारी है।
हारने वालों के लिए खुला रास्ता
अब तक यही कहा जा रहा था कि भाजपा का राष्ट्रीय संगठन किसी भी हाल में हारने वालों को इस बार टिकट नहीं देगा, लेकिन यह बात पहली ही सूची में गलत साबित हो गई है। भाजपा ने पांच पुराने चेहरों को मैदान में उतारा है। ये पहले चुनाव हार चुके हैं। ऐसे में अब जो हार हुए प्रत्याशी हैं वे भी उम्मीद से हैं कि उनको भी टिकट मिल सकता है। कई प्रत्याशी हारने के बाद से ही अपने क्षेत्र में सक्रिय हैं। इनमें से जाे भी राष्ट्रीय संगठन काे जीतने के लायक लगेंगे, उनको प्रत्याशी बनाया जा सकता है।
कई पदाधिकारी लड़ना चाहते हैं
प्रदेश भाजपा संगठन के कई पदाधिकारी चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसकी जानकारी राष्ट्रीय संगठन को भी है। यही वजह है कि पहले चरण में जिला अध्यक्षों के साथ ही जिलों के ऐसे पदाधिकारियों की सूची भी बनाई जा रही है जो चुनाव लड़ना चाहते हैं। प्रदेश संगठन के भी कई पदाधिकारी चुनाव लड़ना चाहते हैं। प्रदेश की उपाध्यक्ष सरला कोसरिया काे प्रत्याशी बनाकर भाजपा ने संकेत दे दिया है कि उसको किसी भी पदाधिकारी को प्रत्याशी बनाने से परहेज नहीं है। जो पदाधिकारी चुनाव लड़ना चाहते हैं, उसमें सबसे अहम तो प्रदेश के तीनों महामंत्री केदार कश्यप, ओपी चौधरी और विजय शर्मा हैं। इसी के साथ संभाग के प्रभारियों में संजय श्रीवास्तव, भूपेंद्र सवन्नी का नाम है। रायपुर के संभाग प्रभारी सौरभ सिंह पहले ही विधायक हैं, वे भी वापस चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसके अलावा और कई पदाधिकारी हैं जो चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं। भाजपा मीडिया विभाग के अमित चिमनानी के साथ ही प्रवक्ता जैसे केदार गुप्ता, नीलू शर्मा भी चुनाव लड़ना चाहते हैं। एक प्रवक्ता देवलाल ठाकुर काे प्रत्याशी बनाए जाने के बाद इनके लिए भी रास्ता खुल गया है।
सांसद भी उतरेंगे मैदान में
पहली सूची में दुर्ग के सांसद विजय बघेल को प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ पाटन से प्रत्याशी बनाया गया है। इसी के साथ पूर्व राज्यसभा सांसद रामविचार नेताम को भी मैदान में उतारा गया है। अब इस बात की चर्चा है कि राष्ट्रीय संगठन प्रदेशाध्यक्ष और सांसद अरुण साव को भी बिलासपुर या बिल्हा से प्रत्याशी बना सकता है। इसी के साथ राजनांदगांव के सांसद संतोष पांडेय को कवर्धा से प्रदेश के मंत्री मो. अकबर के खिलाफ प्रत्याशी बनाया जा सकता है। रायपुर के सांसद सुनील सोनी को भी रायपुर से चुनाव लड़ाने की बात की जा रही है। इसी के साथ कुछ पुराने सांसदों को भी मैदान में उतारने की तैयारी है।



