किसने क्या पाया.. क्या खोया

चुनाव परिणाम विश्लेषण- 2022, अनवर कुरैशी
छत्तीसगढ़ की भानुप्रतापपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव से लेकर दिल्ली नगर निगम,गुजरात- हिमाचल प्रदेश, विधानसभा और यूपी- बिहार से लेकर अन्य स्थानों पर हुए उपचुनाव चुनाव के परिणाम कल से लेकर आज के बीच आ चुके हैं। अब ताेलने की बात ये है कि किस पार्टी के हिस्से में क्या आया,क्या है, उसकी जीत और हार के मायने। 2024 के लोकसभा के लिए ये चुनाव काैन से संदेश दे रहे हैं।
छत्तीसगढ़ की भानुप्रतापपुर सीट कांग्रेस के दिवंगत नेता मनोज मंडावी के निधन के कारण खाली हुई और यहां चुनाव में उनकी पत्नी सावित्री मंडावी जीती है। यह सीट पहले भी कांग्रेस के कब्जे में थी। भाजपा के लिए ये हार इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2018 में भी कांग्रेस ने उसे यहां हराया था। कांग्रेस की जीत उसकी सियासी सेहत के लिए अनुकूल है,लेकिन भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी ओम माथुर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण साव और नेता प्रतिपक्ष के रूप में नारायण चंदेल के कोटे की पहली हार है। उपचुनावों में भाजपा की लगातार हार का पंजा है। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को मिली जीत पार्टी और सरकार के बेहतर प्रदर्शन का प्रतीक है।
दिल्ली नगर निगम
दिल्ली नगर निगम में अरविंद केजरीवाल की आप ने भाजपा की 15 साल से जमी सत्ता को उखाड़ फेंका है। यहां कांग्रेस के पास पाने खोने के लिए कुछ नहीं था। भाजपा के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा पूरी केंद्रीय सरकार, मंत्री से लेकर सांसद और कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी थे। लेकिन अकेले केजरीवाल पर दिल्ली की जनता ने भरोसे और ईमानदारी की मुहर लगाई है। यहां के नतीजे ने साफ कर दिया है कि जनता की प्राथमिकता क्या है। लिहाजा ये साफ है कि भाजपा को यहां करारी मात खानी पड़ी है। यह चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने आप के खिलाफ जेल में बंद उसके मंत्री के तरह-तरह के वीडियो भी जारी करवाए, और शराब घोटाले के आरोप मनीष सिसोदिया पर मढ़ा। लेकिन दिल्ली की जनता ने इन आरोपों,लानत- मलामत को नकारा।
गुजरात में मोदी-मोदी
गुजरात में कांग्रेस ने अपने 2017 तक मिले जनाधार को गंवाया है। इस चुनाव में राहुल गांधी ने भारी मशक्कत की थी, लेकिन इस बार वे दो रैलियों में ही गए,उन्होंने कांग्रेस के लिए बहुत कम प्रचार किया। नतीजों से साफ हुआ कि पार्टी डेढ़ दर्जन सीटें भी नहीं जीत पाई। कांग्रेस ने यहां प्रचार का जिम्मा स्थानीय नेताओं को दिया था, लेकिन मोदी,शाह की जोड़ी और भाजपा की प्रतिबद्ध कार्यशैली के आगे वे कहीं भी टिक नहीं सके। कुल मिलाकर 2017 में राहुल ने बड़ी मेहनत से जो वोट जुगाड़े थे,2022 के खत्म होने तक वह आधार खिसक गया। इस चुनाव में उतरी आप भले ही सीटों के मामलों में अपने बड़बोले दावों पर खरी नहीं उतर पाई,लेकिन वोट प्रतिशत बढ़ाकर राष्ट्रीय दल का रुतबा हासिल करने का लक्ष्य इस चुनाव में उसने हासिल कर लिया। अब भाजपा का क्या… भाजपा ने यहां बंपर जीत हासिल कर अपनी जीत का नया रिकॉर्ड बना लिया है। इसके साथ ही ये मुहर लगी है कि गुजरात की जनता मोदी के साथ है। तकनीकी रूप से देखें तो भाजपा की सीटें बढ़ी है। वोट का प्रतिशत बढ़ा है। इसके अलावा और क्या मिला। यहां 27 साल से भाजपा काबिज थी। अगले पांच साल राज्य में और रहेगी। लेकिन इसके साथ ही भाजपा ने 2024 के लिए जमीन को उपजाऊ बना लिया है। गुजरात की 26 लोकसभा सीटों पर अब भाजपा के लिए संभावनाएं हरी नजर आ रहीं हैं।
पहाड़ों पर मिली पटखनी
भाजपा हिमाचल प्रदेश चुनाव हार गई। यह पहाड़ी प्रदेश भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का गृह प्रदेश है। लेकिन उनके चेहरे से कहीं बहुत अधिक पहचान मोदी के नाम की है। मोदी-और भाजपा यहां का रिवाज बदलने की बात कह रहे थे,लेकिन उनका राज ही बदल गया। परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को इस्तीफा देना पड़ा है।
हिमाचल में हर पांच साल में पार्टी बदलने का रिवाज है। इस जीत के साथ कांग्रेस को क्या मिला। कांग्रेस के हिस्से में एक और राज्य आ गया। छोटा सा ही सही। वरना अब तक पार्टी के पास राजस्थान और छत्तीसगढ़ के अलावा बचा ही क्या है। खास बात ये है कि हिमाचल चुनाव में भले ही राजीव शुक्ल प्रभारी रहें हो,लेकिन इस चुनाव में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने और उनकी टीम ने भी अहम भूमिका अदा की। इस चुनाव में जीत के बाद अब वहां कांग्रेस सरकार बनाने की प्रक्रिया के लिए पर्यवेक्षक के रूप में भूपेश हिमाचल पहुंच रहे हैं।
यूपी बिहार का हाल
यूपी में दिवंगत नेता मुलायम सिंह यादव की मैनपुरी सीट पर उनकी बहु और बेटे अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव 2.88 लाख से अधिक वोटों से जीती हैं। यह जीत सपा को मुलायम के प्रति श्रद्धांजलि स्वरूप मिली है। लेकिन वहीं रामपुर में भाजपा ने दस बार के विधायक आजम खां के लिए जो गड्ढा खोदा आखिर वहां उन्हें गिरा ही दिया। इस सीट पर भाजपा के आकाश सक्सेना जीते हैं। सपा के असीम राजा को हार का सामना करना पड़ा है। कुल मिलाकर यूपी भाजपा रामपुर में जो करना चाहती थी उसे येन-केन प्रकारेण कर ही लिया।
2024 के लिए क्या..
इन चुनाव परिणामों से ये तो साफ हुआ है कि मोदी गुजरात के सबसे लोकप्रिय नेता है। लेकिन उनके नाम की आंधी हिमाचल के पहाड़ों से टकराकर दिशा बदल रही है। पुरानी दिल्ली की तंग गलियों से लेकर नई दिल्ली की चमचमाती सड़कों पर अभी तो केजरीवाल का बोलबाला है। एक तरह गुजरात में जहां भाजपा का जनाधार बढ़ा है तो हिमाचल में और दिल्ली में घटा भी है। कांग्रेस भले की गुजरात में खारे पानी का घूंट पी रही है, लेकिन हिमाचल में भी तो उसकी नाम की हवा चली है।



