आजादी के बाद पहली बार सरंक्षित बैगा जनजाति की महिला चुनाव मैदान में - realtimes
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आजादी के बाद पहली बार सरंक्षित बैगा जनजाति की महिला चुनाव मैदान में

कवर्धा के बोडला ब्लाक से जिला पंचायत सदस्य पद की प्रत्याशी
पीने का साफ पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दे पर लड़ रही है चुनाव

कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के बोडला ब्लाक के गांव केसदा में रहने वाली संरक्षित आदिवासी बैगा समुदाय की एक महिला आजादी के बाद पहली बार जिला पंचायत सदस्य चुनाव के लिए प्रत्याशी बनाई गईं है। खास बात ये है कि दूरदराज के वनक्षेत्र में रहने वाली बैगा जनजाति के लोग खुद दशकों से अपनी समस्याओं से जूझते और अधिकारों से वंचित होते रहे हैं। पहली बार अब ये लोग न केवल अपने अधिकारों के लिए उठ खड़े हुए बल्कि अपने समुदाय के हितों की रक्षा के लिए खुद की नेतृत्व का झंडा उठाए हैं। बैगा आदिवासियों की हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आज के युग में भी ये लोग पीने के पानी के लिए झिरिया पर निर्भर है। शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े होने के साथ ही स्वास्थ्य की समस्या इनके जीवन की बड़ी परेशानी है। इन्ही मुद्दों को लेकर ये लोग अब चुनाव मैदान में उतरे हैं।

बैगा आदिवासी कामू बैगा की पत्नी का नाम जगनी है। 26 साल की यह महिला अपने समुदाय की शायद सबसे अधिक शिक्षित महिला है। जगनी ने कवर्धा कालेज से बीए किया है। उनके पति कामू बैगा भी ग्रेज्युएट है। जुगनी बोडला ब्लाक के क्षेत्र क्रमांक 6 से जिला पंचायत सदस्य पद की प्रत्याशी है। गैरदलीय आधार पर हो रहे इस चुनाव में जुगनी को कांग्रेस ने समर्थन की घोषणा की है।

कवर्धा के पूर्व विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर के प्रयास से इन्हें जिला पंचायत सदस्य चुनाव लड़ने का माैका मिला है। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले की केसदा गांव की रहने वाली जगनी कामू बैगा के लिए यह एक ऐतिहासिक पल है। कांग्रेस पार्टी ने उन्हें जिला पंचायत सदस्य के लिए प्रत्याशी बनाया है। यह फैसला न सिर्फ उनके लिए, बल्कि बैगा समाज की महिलाओं के लिए भी गर्व का विषय है।

आजादी के बाद यह पहली बार है जब किसी राजनीतिक पार्टी ने बैगा समाज की महिला को इस पद के लिए टिकट दिया है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव और महिलाओं की सशक्तिकरण की दिशा में एक कदम है। जगनी कामू बैगा की इस उपलब्धि को विशेष महत्व इस कारण से भी दिया जा रहा है, क्योंकि बैगा समाज हमेशा से आदिवासी समुदाय का हिस्सा रहा है। पारंपरिक रूप से राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उनकी भागीदारी कम रही है। अब जब कांग्रेस पार्टी ने उन्हें टिकट दिया है, तो यह उस बदलाव का प्रतीक बन चुका है, जिसे हम अपने समाज में देखना चाहते हैं। खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए।

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