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ICT में मानकीकरण को गति देने के लिए मानक समन्वय पोर्टल शुरु, केंद्र बिंदु के रुप में किया जाएगा काम

नई दिल्ली: दूरसंचार प्रौद्योगिकियों और मानकों के विकास में भारत को वैश्विक अग्रणी रुप में स्थापित करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए दूरसंचार इंजीनियरिंग केंद्र (टीईसी) द्वारा विकसित मानक समन्वय पोर्टल शुरु किया गया है। पोर्टल का उद्देश्य उद्योग, शिक्षा, अनुसंधान संस्थानों और सरकार सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर वैश्विक मानकीकरण गतिविधियों में भारत की भागीदारी को बढ़ावा देना है। यह दूरसंचार और संबंधित आईसीटी डोमेन के मानकीकरण में जानकारी साझा करने और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक केंद्र बिंदु के रुप में भी काम करेगा। टीईसी ने सी-डॉट और टीएसडीएसआई के सहयोग से ‘दूरसंचार वैश्विक मानक निकायों में भारतीय भागीदारी पर राष्ट्रीय संवर्धन कार्यशाला’ में दूरसंचार सचिव के राजारमन ने पोर्टल का शुभारम्भ किया।

श्री राजारमन ने ‘निष्पक्षता मूल्यांकन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम की रेटिंग’ पर टीईसी मानक का भी अनावरण किया, जिसे टीईसी द्वारा हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के माध्यम से सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है। यह मानक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रणालियों की निष्पक्षता का मूल्यांकन और रेटिंग करने, नैतिक और जिम्मेदार एआई तैनाती सुनिश्चित करने के लिए व्यापक प्रक्रियाओं की रुपरेखा तैयार करता है। कंडीशनल एक्सेस सिस्टम के लिए अनुमोदन प्रमाणपत्र और डुअल बैंड आउटडोर वाई-फाई एक्सेस प्वाइंट के लिए प्रौद्योगिकी अनुमोदन प्रमाणपत्र सी-डॉट को सौंपा गया, जो गुणवत्ता और नवाचार के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। दूरसंचार उत्पादों के स्वैच्छिक प्रमाणन के लिए एक ऑनलाइन मॉड्यूल भी प्रस्तुत किया गया, जो प्रमाण के लिए एक सुव्यवस्थित प्रक्रिया प्रदान करेगा।

दूरसंचार सचिव ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को वैश्विक दूरसंचार मानकीकरण प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने इस उद्देश्य के लिए उद्योग, शिक्षा जगत, स्टार्टअप और सरकारी संगठनों को एक साथ लाने के लिए हर साल ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया। उनका संबोधन अर्थव्यवस्था में अनुसंधान के योगदान और भारत के प्रौद्योगिकी उत्पादक बनने पर केंद्रित था। कार्यशाला में उद्योगों, शिक्षा जगत, सरकारी संगठनों और प्रसिद्ध अनुसंधान और विकास केंद्रों के विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यशाला में मानक-निर्माण प्रक्रियाओं की चरण-दर-चरण प्रक्रिया, पेटेंट को मानक आवश्यक पेटेंट (एसईपी) में परिवर्तित करना, और एक जीवंत मानक समुदाय को बढ़ावा देने में शैक्षणिक संस्थानों की महत्वपूर्ण भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा भी आयोजित हुई।

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