वोटर लिस्ट से नाम कटने के विवाद के बीच चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान

नई दिल्ली। चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के आरोपों के बीच आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। चुनाव आयोग ने देश के 20 राज्यों में एक विशेष अभियान शुरू करने का फैसला लिया है, जिसके तहत उन लोगों से संपर्क किया जाएगा जिनके नाम सूची से हट गए थे।
आयोग ने राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारियों (CEO) को निर्देश दिए हैं कि जहां वोटर लिस्ट सुधार का काम पूरा हो चुका है, वहां छूटे हुए योग्य और नए वोटरों को तुरंत शामिल करने के लिए स्पेशल ड्राइव चलाई जाए।
20 राज्यों में छूटे वोटरों को फिर से जोड़ने का प्लान
चुनाव आयोग की इस स्पेशल ड्राइव का मुख्य उद्देश्य उन सभी योग्य नागरिकों को फिर से मतदाता सूची में शामिल करना है, जिनके नाम गहन सुधार प्रक्रिया के दौरान हट गए थे या छूट गए थे। इसके साथ ही, पहली बार मतदान करने वाले युवाओं का रजिस्ट्रेशन भी इस अभियान के तहत प्रमुखता से किया जाएगा।
इस विशेष अभियान को लेकर चुनाव आयोग ने गुरुवार को आधिकारिक सूचना जारी की। यह निर्देश राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ आयोजित एक वर्चुअल बैठक के बाद दिए गए।
BLO करेंगे पुरानी और नई वोटर लिस्ट का मिलान
आयोग ने बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs) को निर्देश जारी किए हैं कि वे मौजूदा वोटर लिस्ट का SIR से पहले की सूची से मिलान करें। इस मिलान का मकसद उन मतदाताओं की सटीक पहचान करना है, जिनके नाम पहले सूची में शामिल थे, लेकिन फाइनल लिस्ट से बाहर हो गए।
पहचान होने के बाद BLOs ऐसे सभी छूटे हुए लोगों के घर-घर जाकर वेरिफिकेशन (सत्यापन) करेंगे।
हर BLO को हफ्ते में 20 से 25 वोटरों का टारगेट
अभियान को समय पर पूरा करने के लिए चुनाव आयोग ने प्रत्येक अधिकारी को हर हफ्ते 20 से 25 वोटरों को कवर करने का लक्ष्य दिया है। इस योजना के तहत एक महीने के भीतर पूरे वेरिफिकेशन ड्राइव को पूरा करने की तैयारी है।
जांच के दौरान BLOs नए योग्य युवाओं और छूटे हुए वोटरों से मौके पर ही ‘फॉर्म 6’ आवेदन स्वीकार करेंगे। प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह सूची मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) के साथ साझा की जाएगी।
अंदरूनी मतभेद की खबरों के बीच आयोग की सफाई
स्पेशल ड्राइव आयोजित करने का यह फैसला SIR प्रक्रिया के निर्णयों को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की आ रही खबरों के बीच आया है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन खबरों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि SIR से जुड़े सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।


