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दिल्ली जल बोर्ड टेंडर केस में सत्येंद्र जैन को बड़ा झटका

नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के अपग्रेडेशन और क्षमता बढ़ाने से जुड़े टेंडर में कथित अनियमितताओं के मामले में पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन और डीजेबी के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने की मांग वाली याचिका भी खारिज कर दी। वहीं, डीजेबी के पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव को दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने इस मामले में कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है। बुधवार को जांच एजेंसी ने सत्येंद्र जैन, उदित प्रकाश राय समेत तीन आरोपियों की 14 दिन की न्यायिक हिरासत मांगी। वहीं, अंकित श्रीवास्तव की पुलिस हिरासत की मांग की गई।

क्या है पूरा मामला?

ACB का आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड के STP के अपग्रेडेशन और क्षमता बढ़ाने से जुड़े टेंडर में शर्तों के साथ छेड़छाड़ की गई। एजेंसी ने आपराधिक साजिश और कथित रिश्वतखोरी के आरोप भी लगाए हैं।

मामले में दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत पर मई 2024 में FIR दर्ज की गई थी। इसमें टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितता, शर्तों में हेरफेर और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं।

ACB ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अलावा धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं में भी केस दर्ज किया है।

सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी पर क्या दलील दी गई?

सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन के वकील ने उनकी गिरफ्तारी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि FIR मई 2024 में दर्ज हुई थी, लेकिन जैन को पहली बार 5 अगस्त 2026 को पूछताछ के लिए बुलाया गया। इसके बाद मंगलवार को फोन करके बुलाया गया और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

बचाव पक्ष ने कहा कि गिरफ्तारी को सही ठहराने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। वकील ने अदालत को बताया कि सत्येंद्र जैन की ओर से जमानत याचिका भी दाखिल की जाएगी।

उदित प्रकाश राय के वकील ने भी गिरफ्तारी का विरोध किया। उन्होंने बताया कि उनके मुवक्किल फिलहाल मिजोरम सरकार में सचिव के पद पर तैनात हैं। अन्य आरोपियों के वकीलों ने भी गिरफ्तारी को लेकर अपनी दलीलें रखीं।

सत्येंद्र जैन ने तकनीकी काम से खुद को अलग बताया

सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन ने परियोजना के तकनीकी पहलुओं से खुद को अलग बताया। उन्होंने कहा कि वह अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह पर निर्भर थे।

जैन के मुताबिक, परियोजना का मुख्य उद्देश्य यमुना की सफाई था। नए STP बनाने में चार से पांच साल लग सकते थे। इसलिए मौजूदा संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने का फैसला लिया गया।

उन्होंने बताया कि शुरुआती योजना रोजाना 300 मिलियन गैलन (MGD) पानी के शोधन की थी। परियोजना की अनुमानित लागत करीब पांच करोड़ रुपये प्रति MGD थी। बाद में टेंडर को चार पैकेज में बांटा गया, जिनकी कुल अनुमानित बोली करीब 1,500 करोड़ रुपये थी।

जैन ने यह भी कहा कि प्री-बिड बैठक के समय वह जेल में थे। इसलिए बैठक में हुई चर्चा की उन्हें जानकारी नहीं थी। उन्होंने जांच एजेंसियों पर उन्हें मामले में फंसाने का आरोप भी लगाया।

मई 2024 में दर्ज हुई थी FIR

दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर मई 2024 में इस मामले में FIR दर्ज की गई थी। जांच का केंद्र दिल्ली जल बोर्ड के STP के विस्तार और अपग्रेडेशन से जुड़े टेंडर हैं।

ACB ने मंगलवार को सत्येंद्र जैन समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया था। बुधवार को आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां कोर्ट ने पांच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

पहले भी तिहाड़ जा चुके हैं सत्येंद्र जैन

आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को 30 मई 2022 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल भेजा गया।

मई 2023 में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी थी। मार्च 2024 में अंतरिम जमानत की याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया।

बाद में राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दी थी। इसके बाद 18 अक्टूबर 2024 को वह जेल से बाहर आए थे।

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