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राष्ट्रपति किम जोंग-उन ने उत्तर कोरिया में हथियारों का खुद किया परीक्षण

सियोल। उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग-उन की निगरानी में दक्षिण कोरिया को निशाना बनाने में सक्षम उन्नत हथियारों के परीक्षण किया गया। सरकारी मीडिया के अनुसार, इन परीक्षणों में नए मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर, टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलों और लंबी दूरी तक मार करने वाले तोपखाने के गोले शामिल थे।

उत्तर काेरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी योनहाप ने दक्षिण काेरिया की सरकारी मीडिया केसीएनए के हवाले से बताया है कि उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग-उन ने दक्षिण कोरिया को निशाना बनाने में सक्षम नए और उन्नत हथियारों के परीक्षण की खुद निगरानी की। यह परीक्षण देश की पांच वर्षीय रक्षा विकास योजना के तहत आर्टिलरी और मिसाइल प्रणालियों के आधुनिकीकरण के उद्देश्य से किया गया।

गुरुवार को हुए इन परीक्षणों में 240 मिमी 24-ट्यूब मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के उन्नत संस्करण, टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलों के विशेष मिशन वॉरहेड और 155 मिमी सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर के लिए लंबी दूरी तक मार करने वाले गोले की क्षमता काे परखा गया।

केसीएनए के अनुसार, नए 24-ट्यूब रॉकेट लॉन्चर में ऑटोनॉमस प्रिसिजन गाइडेंस सिस्टम लगाया गया है और इसकी मारक क्षमता बढ़ाकर 90 किलोमीटर कर दी गई है। वहीं, 155 मिमी होवित्जर के लिए 65 किलोमीटर तक मार करने वाले नए गोले का भी सफल परीक्षण किया गया।

उत्तर कोरिया ने दावा किया कि टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलों के विशेष वॉरहेड दुश्मन के एयरबेस, बंदरगाहों और बिजली जैसी महत्वपूर्ण अवसंरचना को पूरी तरह नष्ट करने के लिए तैयार किए गए हैं।

परीक्षण के बाद किम जोंग-उन ने कहा कि ये नतीजे “दक्षिणी सीमा पर फायरपावर की स्थिति में बदलाव” के बीच देश के प्रमुख हथियारों की तकनीकी प्रगति को साबित करते हैं। उन्होंने कहा कि दुश्मनों को लगातार चिंता और भय की स्थिति में रखना युद्ध को रोकने की रणनीति का अहम हिस्सा है और जल्द ही सभी लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों को उन्नत संस्करणों से बदल दिया जाएगा।

यह परीक्षण ऐसे समय हुआ है जब गुरुवार को 1950-53 के कोरियाई युद्ध की शुरुआत की 76वीं वर्षगांठ भी थी। माना जा रहा है कि इसका उद्देश्य दक्षिण कोरिया के प्रमुख सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने की उत्तर कोरिया की क्षमता का प्रदर्शन करना था।

उत्तर कोरिया ने 2023 के अंत में दक्षिण कोरिया को अपना “मुख्य दुश्मन” घोषित किया था। इसके बाद से प्योंगयांग लगातार अपनी टैक्टिकल मिसाइलों, तोपखाना प्रणालियों और अन्य पारंपरिक हथियारों का आधुनिकीकरण कर रहा है तथा उन्हें दक्षिण कोरिया की सीमा के पास तैनात करने की नीति पर आगे बढ़ रहा है।

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