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तिरंगे के रंग में रंगा कवर्धा शहर, मंत्री अकबर के नेतृत्व में निकली हमर तिरंगा रैली

हजारों की भीड़ उमड़ी, राष्ट्र रंग से हुई सराबोर

कवर्धा(realtimes) शनिवार 13 अगस्त का दिन कबीरधाम जिले के कवर्धा शहर के लिए ऐतिहासिक रहा। इस दिन कवर्धा शहर तिरंगे के रंग में इस कदर रंगा का सारा शहर राष्ट्रधव्ज के तीन रंगों में रचा बसा नजर आ रहा था। दरअसल इस दिन कवर्धा के विधायक और राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर के नेतृत्व में हमर तिरंगा रैली का आयोजन किया गया था। शहर के सभी 27 वार्डों से हमर तिरंगा रैली गुजरी और गांधी मैदान में एक जनसभा के रूप में तब्दील हो गई। इस माैके पर श्री अकबर ने बिना किसी औपचारिकता के जन समुदाय को संबोधित किया। उनके भाषण के मुख्य अंश

देशभक्त, शांतिप्रिय और सद्भाव में आस्था रखने वाले कवर्धा के मेरे प्रिय भाईयों और बहनों।

      हम सब आज यहां तिरंगा यात्रा में शामिल होने आए हैं ………….

 ये राजनीतिक यात्रा नहीं है ……. ये धर्म या समाज से जुड़ी यात्रा नहीं है…… ये तिरंगे की शान में और उसके सम्मान में आयोजित यात्रा है।

     ये यात्रा दरअसल हमारा संकल्प है ………..

    भाइयों बहनों जब हम तिरंगे की बात करते हैं…………जब हम तिरंगा यात्रा निकालतें हैं …………….तो हम ये जानते हैं कि हमारे देश के राष्ट्रीय ध्वज इस तिरंगे ने हमको कितनी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

     हम तो भारत माता के वो सिपाही हैं, जिनकी पीढ़ियों ने इस तिरंगे के लिए कुर्बानियां दीं……………शहादतें दीं………….सीने पर गोलियां खाईं………….अपना लहू बहाया……।

      हम तो वो लोग हैं…………जो अपनी मां, भारत माता को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए दुनिया के शायद सबसे बड़े स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बने……

      हमारे पुरखे लड़े……..कुर्बानियां दीं…….अंग्रेजों से आजादी छीन कर हासिल की फिर अपने देश को एक नई ताकत देने के लिए………अपने देश के नागरिकों को गरिमा और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देने के लिए…..हमें एक संविधान दिया और आजादी का यह गौरवशाली प्रतीक तिरंगा हमें सौंपा…………

    हमारे पुरखों ने संविधान के नाम पर हमें कागजों का एक पुलिंदा नहीं सौंपा था और न ही तिरंगे नाम का तीन रंगों का साधारण कपड़ा ही सौंपा था………..दोस्तों हमारे पुरखों ने उस दिन हमसे एक संकल्प लिया था………..वो संकल्प था, इस देश की आजादी को सहेज कर रखना।

     पर मैं एक बात और कहना चाहता हूं साथियों । आजादी की रक्षा का मतलब क्या है?       इस बात को हमें समझना होगा।

    आज इस देश में ऐसे भी लोग हैं जो आजादी की लड़ाई के दौर में अंग्रेजों के पिट्ठू थे, उनके मुखबिर थे, उनसे माफी मांगते थे और उनसे पेंशन लेते थे..

      ये वो लोग हैं जिन्हें ना ये एहसास है कि आजादी के मूल्य क्या हैं…………ना इस बात का एहसास है कि तिरंगे का सम्मान देश में अमन और भाईचारें से है……………देश में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसरों से है……….देश में एक मजबूत लोकतंत्र से है।

     जो लोग महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस या भगत सिंह के देश में लोकतंत्र विरोधी माहौल बना रहे हैं………..वो हमें देशभक्ति का प्रमाणपत्र बांटने निकले हैं।

    भाइयों बहनों तिरंगे की शान इस बात में है कि हमारे देश का एक-एक नागरिक गरिमा और सम्मान का जीवन बिताए। लेकिन दुर्भाग्य से आज इस देश की जड़ों को खोखला किया जा रहा है।

      देश को चंद उद्योगपतियों के हाथों गिरवी रख दिया जा रहा है……देश में आज तक की सबसे भयावह बेरोजगारी है………..मंहगाई जीने नहीं दे रही है……….हमारे औद्योगिक तीर्थ जिन्होंने बड़ी से बड़ी मंदी में भी इस देश की अर्थव्यवस्था को संभाला था बेचे जा रहे हैं……….

      जिस आधुनिक भारत का निर्माण गांधी जी के मूल्यों की प्रेरणा से पंडित नेहरू ने किया था उस आधुनिक भारत को नष्ट करने की साजिशें रची जा रही हैं।

      तिरंगे का सम्मान तो इस बात में भी है साथियों की आज हम संकल्प लें कि हम आधुनिक भारत की उस कल्पना के साथ मजबूती से खड़े रहें………संकल्प लें कि हम अपने लोकतंत्र की रक्षा करेंगे।

     साथियों मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कांग्रेस पार्टी ही वो पार्टी है……जिसने आजादी के लिए सिर्फ लड़ाई ही नहीं लड़ी……..बल्कि अपनी आजादी को बचाने के लिए भी हमारे नेताओं ने शहादतें दीं……..पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की शहादतें इस बात की प्रतीक हैं।

    कांग्रेस पार्टी ही वो पार्टी है जिसने अपने नागरिकों को सूचना का अधिकार, भोजन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम जैसे रोजगार के कानूनी अधिकार दिए।

      आज हमारे राज्य में मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार इसी रास्ते पर है……….आज छत्तीसगढ़ में गांधी जी और नेहरू जी के मूल्यों पर काम हो रहा है।

      हम गरीबी से लड़ रहे हैं……बेरोजगारी को मात देने की कोशिश कर रहे हैं……..शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐसे काम कर रहे हैं जिनकी वजह से देश में भूपेश सरकार के छत्तीसगढ़ मॉडल की चर्चा हो रही है………

     हमने ऐसी नीतियां बनाई हैं………जिनकी बदौलत अनुसूचित जातियों, जनजातियों और पिछड़ा वर्ग को आर्थिक, सामाजिक रूप से ताकत मिल रही है…….आज छत्तीसढ़ विकास की जो गाथा लिख रहा है। वो आधुनिक भारत की हमारी कल्पना को साकार करने की दिशा में ही है।

  कवर्धा की हर गली और हर मोहल्ले में भारत माता की जय के नारे गूंजें। भारत माता की जय का असली मतलब होगा कवर्धा………विकास और एकता की ऐसी इबारत लिखे कि देश में गर्व के साथ कहा जाए ………..भारत माता की जय का सबसे बुलंद नारा कवर्धा की जनता ने लगाया है……….

      कवर्धा की जनता छत्तीसगढ़ और देश की हर उस आवाज के साथ अपनी आवाज मिलाएगी जो हमारी एकता, अखंडता और विकास के हक की आवाज होगी……….

   आप सभी का पुनः अभिनंदन।। जय जोहार, जय छत्तीसगढ़, जय हिन्द।

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