ग्लासगो में सेना का जलवा, खिलाड़ियों ने जीते 16 पदक

नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ग्लासगो में हाल ही में संपन्न राष्ट्रमंडल खेलों में शानदार प्रदर्शन करने वाले भारतीय सेना के खिलाड़ियों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों ने शारीरिक और मानसिक दबाव पर काबू पाकर देश का गौरव बढ़ाया है और वे विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय सेना के दल के सदस्यों से मुलाकात की। भारतीय सेना के खिलाड़ियों ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में 16 पदक—आठ स्वर्ण, सात रजत और एक कांस्य पदक जीते।
इसके अलावा दो पदक भारतीय नौसेना ने भी जीते। भारत ने खेलों में कुल 39 पदक हासिल किए, जिनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य शामिल हैं।
राजनाथ सिंह ने खिलाड़ियों के प्रदर्शन को ‘असाधारण’ बताते हुए उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए शारीरिक और मानसिक चुनौतियों से पार पाना इन खिलाड़ियों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि ये खिलाड़ी लोगों, खासकर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं, क्योंकि इनमें एक सैनिक और एक चैंपियन का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलता है।
मुक्केबाजी में भारत के सात स्वर्ण पदकों में से छह भारतीय सेना के मुक्केबाजों ने जीते। इनमें चार स्वर्ण महिला मुक्केबाजों के खाते में आए। रक्षा मंत्री ने इसे देश की बढ़ती नारी शक्ति का प्रमाण बताया।
उन्होंने कहा कि महिला खिलाड़ियों की यह सफलता अधिक से अधिक लड़कियों को खेलों को करियर के रूप में अपनाने और रक्षा बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित करेगी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से चैंपियन उभरकर सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेलों का लोकतंत्रीकरण हुआ है और अब यह किसी चुनिंदा वर्ग का विशेषाधिकार नहीं रह गया है।
उन्होंने खिलाड़ियों को आगामी एशियाई खेलों और ओलंपिक जैसी बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दीं।
सेना के खिलाड़ियों ने रचे कई नए इतिहास
ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय सेना के अभियान में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां दर्ज हुईं। नायब सूबेदार सर्वेश कुशारे ने ऊंची कूद में भारत का पहला राष्ट्रमंडल खेलों का रजत पदक जीता।
वहीं नायब सूबेदार गुलवीर सिंह एक ही राष्ट्रमंडल खेलों में दो एथलेटिक्स पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बने। उन्होंने 10,000 मीटर में रजत और 5,000 मीटर में कांस्य पदक जीता।
हवलदार हर्ष सिंह ने 60 किग्रा जूडो में भारत को इस खेल का पहला राष्ट्रमंडल खेल स्वर्ण पदक दिलाया। पैरा शॉट पुट में सूबेदार सोमन राणा और लांस नायक शुभम जुयाल ने क्रमशः स्वर्ण और रजत पदक जीतकर इतिहास रचा।
भारोत्तोलन में हवलदार अजय बाबू ने 79 किग्रा वर्ग में 149 किग्रा का स्नैच और कुल 330 किग्रा वजन उठाकर रिकॉर्ड प्रदर्शन किया।
मुक्केबाजी में ऐतिहासिक प्रदर्शन
मुक्केबाजी में भारतीय सेना के खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। भारत ने एक ही राष्ट्रमंडल खेलों में मुक्केबाजी के सात स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास बनाया। इन सात स्वर्ण और तीन रजत पदकों में से भारतीय सेना के मुक्केबाजों ने छह स्वर्ण और दो रजत पदक अपने नाम किए।
इन उपलब्धियों के पीछे वर्षों का अनुशासित प्रशिक्षण, त्याग, पेशेवर कोचिंग, खेल विज्ञान का सहयोग और खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों तथा सहयोगी स्टाफ की कड़ी मेहनत रही। मिशन ओलंपिक विंग और उसके उच्च प्रदर्शन केंद्रों ने भी खिलाड़ियों की तैयारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



