इस मछली को नही पाल सकते, खाना, खिलाना और बेचना भी है प्रतिबंधित, वरना लगेगा 25 हजार का जुर्माना

0 एक्जोटिक मांगूर (क्लेरियस गेरिपिनियस) तथा बींग हेड (हाइपोप्थेलमिक्थीस नोबीलीस)मछलियां प्रतिबंधित
रायपुर। क्या आप जानते हैं कि मछलियों की कुछ प्रजाति को पालने से लेकर खाना, खिलाना और बेचना-खरीदना बेचना प्रतिबिंधित है। यही नहीं, इन मछलियों का परिवहन भी नहीं कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जहां मछली का उत्पादन बड़ी मात्रा में होता। यहां के लोग शाैक से मछली खाते है, लेकिन इसके साथ ही देश के अन्य राज्यों में बिक्री के लिए भेजी जाती है। लिहाजा मछली पालने और खाने-खिलाने के शाैकीनों को उन मछलियों की पहचान करना भी जरुरी है जिस पर भारत सरकारने प्रतिबंध लगा रखा है।
भारत शासन द्वारा अधिसुचित एक्जोटिक मांगूर (क्लेरियस गेरिपिनियस) तथा बींग हेड (हाइपोप्थेलमिक्थीस नोबीलीस) के पालन पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया गया है। मछली पालन विभाग ने बताया कि राज्य शासन द्वारा भी छत्तीसगढ़ मत्स्य क्षेत्र (संशोधन) अधिनियम 2015 से जारी अधिसूचना के अंतर्गत प्रदेश में उक्त प्रजाति की मछलीयों के पालन, संर्वधन, आयात, निर्यात, विक्रय, परिवहन तथा विपणन के लिए ’प्रतिषिद्ध मत्स्य’ घोषित किया गया है। उन्होंने बताया कि अवैधानिक रूप से प्रतिबंधित मछलीयों के पाए जाने पर छत्तीसगढ राजपत्र (असाधरण) में 01 जनवरी 2026 को प्रकाशित छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) (द्वितीय) अधिनियम, 2025 के अनुसूची 04 अनुसार, छत्तीसगढ़ मत्स्य क्षेत्र अधिनियम 1948 की धारा 05 के तहत 25 हजार रुपए तक की शास्ति से दंडित किये जाने तथा पाली गई मछलीयों के मत्स्यबीज एवं भंडारण को तत्काल नष्ट करने का प्रावधान है।



