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इस गांव में दी जाती है अनूठी श्रद्धांजलि

रायपुर। नवा रायपुर से लगे एक गांव की कहानी कुछ अलग ही है, यहां लोगो को दुख और संकट की घड़ी में साथ देने के लिए लोग एक अलग ही तरीके से लेकिन बेहद खामोशी के साथ एकजुट होते हैं। घोरभट्टी नाम के इस गांव में अगर किसी गरीब जरूरतमंद परिवार के सदस्य की मौत हो जाती है तो आस-पड़ोस के लोग मिलकर अपनी-अपनी ओर से आर्थिक मदद करते हैं, लोग आपस में रकम जुटाकर दशगात्र से पहले संबंधित परिवार को जमा की हुई राशि देते है। हमारी नजर में यह श्रद्धांजलि का एक अनूठा तरीका है।

इस तरह बना श्रद्धांजलि ग्रुप

घोरभट्टी निवासी नारद पाल ने बताया कि इस सहयोगी भाव की शुरुआत कैसे हुई। अब से करीब दो साल पहले गांव के एक गरीब युवक की माैत हो गई थी, तभी उसके हमउम्र दोस्तों ने मिलकर तय किया कि युवक के परिवार को आर्थिक मदद की जाए। सब दोस्तों ने मिलकर अपने पास से थोड़ी-थोड़ी रकम जमा की और युवक के परिवार को राशि साैंप दी। बस इसके बाद से ये परंपरा बन गई कि गांव में किसी गरीब जरुरतमंद की मृत्यु होने पर गांव और आसपास के लोग मिलकर राशि जमा करते हैं और दशगात्र से पहले राशि जुटाकर देते हैं।

नारद पाल ने बताया कि गांव में किसी की मृत्यु होने पर उसका शोक पत्र आसपास के लोगों के बीच बांटा जाता है, जो लोग परंपरा का निर्वाह करना चाहते हैं, वे अपनी तरफ से कुछ राशि जमा करते हैं, यह काम दशगात्र यानि मृत्यु के दस दिन के पहले तक चलता है। कई बार 5-6 हजार रुपए तक जमा होते हैं, लेकिन आमतौर पर तीन-साढ़े तीन हजार रुपए भी जुट जाते हैं, यह राशि संबंधित परिवार को दशगात्र से पहले सौंप दी जाती है। घोरभट्टी से शुरु हुई इस परंपरा में अब पड़ोस के गांवों के लोग भी जुटने लगे। इस तरह अब तक 50 से अधिक लोगों की मृत्यु पर उनके परिवारों को राशि दी जा चुकी है। नारद पाल के मुताबिक यह काम करने के लिए बना समूह श्रद्धांजलि ग्रुप के रूप में जाना जाता है।

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