सरकार ने घरेलू हवाई किराये पर लगाई सीमा को हटाया - realtimes
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सरकार ने घरेलू हवाई किराये पर लगाई सीमा को हटाया

दिल्ली : सरकार ने घरेलू हवाई किरायों पर लगाई गई अस्थायी सीमा को 23 मार्च से हटाने का फैसला किया है। पिछले साल दिसंबर में इंडिगो संचालन में आई दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए घरेलू हवाई किराये की अधिकतम सीमा तय की गई थी। नागर विमानन मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार, हवाई किराये पर लगी सीमा को 23 मार्च से हटा दिया जाएगा। ये आदेश ऐसे समय में आया है, जब घरेलू एयरलाइन कंपनियां पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच बढ़ती लागत और रुकावटों से जूझ रही हैं।

मंत्रालय ने अपने आदेश में क्या कहा
मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा, ”एयरलाइन कंपनियां ये सुनिश्चित करेंगी कि किराया उचित, पारदर्शी और बाजार की स्थितियों के अनुरूप बना रहे और यात्रियों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।” मंत्रालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि किराये में अत्यधिक या अनुचित बढ़ोतरी के किसी भी मामले और व्यवधान को गंभीरता से लिया जाएगा। मंत्रालय वास्तविक समय के आधार पर हवाई किराए की निगरानी कर रहा है। 

इंडिगो संकट के बीच लगाई गई थी सीमा
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने दिसंबर में हवाई किराये पर पाबंदियां लगाई थीं, जब इंडिगो द्वारा बड़ी संख्या में फ्लाइट्स कैंसिल करने के बाद दूसरी कंपनियों ने किराया बढ़ा दिया था। सरकार ने उस समय दूरी के आधार पर टिकट की कीमतें तय की थीं, जिसमें एक तरफ की यात्रा के लिए 18,000 रुपये की ऊपरी सीमा तय की गई थी। हालांकि, इंडिगो संकट तो कुछ दिनों के बाद खत्म हो गया, लेकिन किराये पर लगी ये पाबंदियां नहीं हटीं। 

वित्तीय दबाव से जूझ रही हैं एयरलाइन कंपनियां
भारतीय एयरलाइन कंपनियों ने अभी हाल ही में सरकार को बढ़ते वित्तीय दबाव के बारे में चेतावनी दी थी। कंपनियों ने कहा था कि ईंधन की बढ़ती कीमतों और परिचालन में आ रही रुकावटों के बीच किराये पर लगी ये पाबंदियां अब और नहीं चल सकतीं। इंडिगो, एयर इंडिया और स्पाइसजेट का प्रतिनिधित्व करने वाले फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने चेतावनी दी थी कि अगर ये पाबंदियां जारी रहीं तो एयरलाइन कंपनियों को अपने कुछ रूट बंद करने पड़ सकते हैं। इतना ही नहीं, कंपनियों को अपने बेड़े और नेटवर्क के विस्तार में भी देरी करनी पड़ सकती है। 

एयरलाइन कंपनियों का खर्च बढ़ा
इस उद्योग संगठन ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से पहले ही एयरलाइन कंपनियां दबाव में थीं। उन्होंने पाकिस्तान द्वारा उसके एयर स्पेस पर लगाए गए प्रतिबंधों का हवाला दिया, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और लागत दोनों बढ़ गई हैं।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने अपनी चिट्ठी में कहा था, “अगर मौजूदा हालात ऐसे ही बने रहे तो एयरलाइन कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा। इससे कई कंपनियां ऐसी वित्तीय स्थिति में पहुंच जाएंगी, जिसे संभालना मुश्किल होगा और उनके अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा सकता है।”

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