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ऑपरेशन सिंदूर ने राजनीतिक और कूटनीतिक दोनों तरह से भारत की सोच बदल दी: जितेंद्र सिंह

ऑपरेशन सिंदूर ने राजनीतिक और कूटनीतिक दोनों तरह से भारत की सोच बदल दी: जितेंद्र सिंह

 नयी दिल्ली.  केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने राजनीतिक और कूटनीतिक, दोनों तरह से भारत की सोच बदल दी है और पूरी दुनिया इसकी गवाह है। जम्मू कश्मीर के उधमपुर से लोकसभा सदस्य एवं केंद्रीय मंत्री सिंह ने यह भी कहा कि सिंधु जल संधि जल्दबाजी में की गई थी, क्योंकि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पाकिस्तान को खुश करना चाहते थे। कार्मिक राज्य मंत्री सिंह ने विजय के. सजावल द्वारा लिखी पुस्तक “कश्मीर क्रॉनिकल्स” का यहां कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में विमोचन करने के बाद कहा कि यह संधि दोनों देशों के लिए न्याय करने में असफल रही। उन्होंने कहा कि 2019 के पुलवामा हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक के पश्चात, भारत ने अपनी रक्षा रणनीतियों में बदलाव की शुरुआत की थी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बलों को परिस्थितियों के अनुसार तथा पेशेवर ज्ञान एवं विवेक के आधार पर कार्य करने की पूरी स्वतंत्रता दी थी। उन्होंने कहा कि यह 2014 से पहले की प्रथा के बिल्कुल विपरीत है, जब सेनाओं को केवल सीमित स्वतंत्रता थी और बड़े हमले के लिए उन्हें नयी दिल्ली से राजनीतिक मंजूरी का इंतजार करना पड़ता था। मंत्री ने कहा कि 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी बुनियादी ढांचे को नष्ट करने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा शुरू किया गया ऑपरेशन सिंदूर, अब तक की प्रचलित पद्धति में बदलाव का परिणाम है। सिंह ने कहा कि अब भारत का रक्षा विभाग सक्रिय रहेगा, न कि दुश्मन के हमले के बाद प्रतिक्रियात्मक।

 

सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने तीन स्तरों पर महत्वपूर्ण संदेश दिया है – घरेलू स्तर पर इसने देश के लोगों को यह विश्वास दिलाया है कि भारत अब वैश्विक गुरु की भूमिका निभाने के लिए तैयार है, पाकिस्तान को स्पष्ट रूप से संदेश दिया है कि आज का भारत अब 1965 या 1971 वाला भारत नहीं है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह जोरदार तरीके से संदेश दिया है कि भारत एक ताकत के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए अगला लक्ष्य 2047 का विकसित भारत होगा और भारत का अगला एजेंडा पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर को वापस लेना होगा, जो केवल मोदी के नेतृत्व में ही संभव है। इससे पहले, पुस्तक के लेखक ने एक कश्मीरी पंडित के रूप में अपने व्यक्तिगत अनुभव तथा पिछले कई वर्षों के दौरान जम्मू कश्मीर के प्रति अपने दृष्टिकोण के बारे में विस्तार से बात की।

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