अनिरुद्धाचार्य ने मुफ्त की राजनीति, प्रेम और शादी पर क्या कहा? - realtimes
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अनिरुद्धाचार्य ने मुफ्त की राजनीति, प्रेम और शादी पर क्या कहा?

कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी महाराज ने ‘मेरे तो गिरिधर गोपाल’ में कर्म, मुफ्त की राजनीति, युवाओं के प्रेम संबंध, शादी और रिश्तों में बढ़ती हिंसा जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता के लिए कर्म जरूरी है। हर चीज मुफ्त में मिलने की आदत व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने से रोक सकती है। उन्होंने युवाओं से पढ़ाई, मेहनत और करियर पर ध्यान देने की अपील भी की।

‘कर्म प्रधान है, कर्म नहीं करोगे तो खाओगे क्या?’

अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि समाज में हर चीज मुफ्त में पाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। लोग बिना मेहनत किए सुविधाएं चाहते हैं। उन्होंने कहा, “कर्म प्रधान है, कर्म नहीं करोगे तो खाओगे क्या?”

मुफ्त सुविधाओं की राजनीति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अगर व्यक्ति को हर चीज बिना मेहनत के मिलती रहे, तो उसकी काम करने की क्षमता कमजोर हो सकती है। लगातार मुफ्त सुविधाओं पर निर्भर रहने से व्यक्ति आत्मनिर्भर बनने के बजाय दूसरों पर निर्भर हो सकता है।

उन्होंने बच्चों का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर छोटे बच्चे को चलने ही न दिया जाए और हर वक्त सहारा दिया जाए, तो उसके पैरों में मजबूती कैसे आएगी? बच्चा गिरेगा, उठेगा और फिर चलेगा। तभी उसके पैरों में ताकत आएगी।

उनके मुताबिक, इसी तरह व्यक्ति को भी जीवन में संघर्ष और मेहनत करने का अवसर मिलना चाहिए।

युवाओं को प्रेम संबंधों से बचने और पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह

युवाओं के प्रेम संबंधों पर बात करते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि पढ़ाई और करियर बनाने की उम्र में युवाओं को अपना ध्यान भटकने नहीं देना चाहिए।

उन्होंने एक युवक का उदाहरण भी सुनाया। युवक ने उनसे कहा था कि उनकी बात सुनकर उसने अपना प्रेम संबंध खत्म कर दिया, क्योंकि उसका ध्यान पढ़ाई से हट रहा था।

अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि युवाओं को किसी रिश्ते में पड़ने से पहले यह समझना चाहिए कि सामने वाला व्यक्ति वास्तव में उनसे प्रेम करता है या किसी स्वार्थ के लिए उनके साथ है। उन्होंने युवाओं से पढ़ाई, मेहनत और करियर पर ध्यान देने की अपील की।

पति-पत्नी के रिश्ते में बाहरी दखल के खिलाफ

अनिरुद्धाचार्य ने पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी के बीच हस्तक्षेप करना सही नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे पति-पत्नी के बीच तलाक कराने के पक्ष में नहीं हैं। उनके मुताबिक, वैवाहिक रिश्ते में बाहर के व्यक्ति को दखल नहीं देना चाहिए।

‘शादी से पहले और बाद में चरित्र को पवित्र रखना चाहिए’

शादी और प्रेम संबंधों के संदर्भ में अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि व्यक्ति को अपने चरित्र को लेकर सजग रहना चाहिए। उनके मुताबिक, विवाह के बाद पति या पत्नी के पुराने रिश्तों को लेकर विवाद पैदा हो सकता है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को रिश्तों को लेकर गंभीरता और जिम्मेदारी समझनी चाहिए। साथ ही उन्हें अपने माता-पिता के सपनों और उनकी उम्मीदों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि माता-पिता बच्चों को पढ़ने और अपना भविष्य बनाने के लिए भेजते हैं। इसलिए बच्चों को अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान देना चाहिए।

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