उत्पादन कंपनी के संयंत्रों में नहीं होगी मानसून में कोयले का कमी, अभी से भरपूर स्टॉक
रायपुर(realtimes) मानसून में जब बारिश के कारण काेयले की खदानों में पानी भर जाता है ताे कई दिनों तक काेयला नहीं मिल पाता है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी के उत्पादन संयंत्रों में मानसून के लिए अभी से कोयले का भरपूर स्टॉक कर दिया गया है। कोरबा वेस्ट के ही एक संयंत्र में एक सप्ताह का स्टॉक है, बाकी में एक माह से ज्यादा का स्टॉक है। कोरबा वेस्ट में भी जल्द स्टॉक बढ़ाया जाएगा। बारिश में बिजली की कोई कमी होने वाली नहीं है। वैसे भी बारिश के समय खपत में बहुत कमी आ जाती है, लेकिन बारिश कम होने की स्थिति में कृषि पंपों के कारण खपत में इजाफा भी हो जाता है।
मानसून के लिए उत्पादन संयंत्रों में कम से कम 15 दिनों का स्टॉक रखना पड़ता है। कई बार बारिश में जब खदानों में पानी भर जाता है तो कोयला नहीं मिल पाता है। ऐसे समय में बिजली का उत्पादन प्रभावित हो जाता है। यही वजह है कि पॉवर कंपनी बारिश से पहले जितना ज्यादा से ज्यादा स्टॉक संभव होता है, वह अपने संयंत्रों रखने का काम करती है। स्टॉक को देखते हुए अब खदानों में पानी में भरा तो परेशानी होने वाली नहीं है।
एक माह से ज्यादा का स्टॉक
पॉवर कंपनी के कोरबा वेस्ट में 120 मेगावाट के चार और पांच सौ मेगावाट की एक यूनिट है। इस संयंत्र में एसईसीएल की खदान से कोयला सीधे कन्वेयर बेल्ट के माध्यम से आता है। यही वजह है कि यहां के संयंत्र में परेशानी नहीं होती है। इस संयंत्र में आमतौर पर एक सप्ताह का कोयले का स्टॉक पर्याप्त माना जाता है। इस समय यहां पर इतने दिनों का ही स्टॉक है। लेकिन आने वाले समय में यहा भी स्टॉक बढ़ाया जाएगा। पंडित श्याम प्रसाद मुखर्जी संयंत्र में 250 मेगावाट की दो यूनिट है। इसमें रोज 8 हजार टन कोयला लगता है। इस संयंत्र में इस समय 3.25 लाख टन कोयला है। यानी 40 दिनों के लिए कोयले का स्टॉक है। मड़वा में 500 मेगावाट की दो यूनिट है। यहां पर कोयला पॉवर कंपनी की खुद की गारे पेलमा की खदान से आता है। यहां चार लाख टन कोयला है। यहां पर रोज 15 हजार टन कोयला लगता है। इस हिसाब से यहां पर 26 दिनों का स्टॉक है।



