पावर कंपनी के पेंशन कोष को 13 हजार करोड़ का बड़ा झटका

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य पावर कंपनी एक तरफ जहां 13 हजार करोड़ के कर्ज से लदी हुई है, वही कंपनी से पेंशन पाने वाले 15 हजार से ज्यादा अधिकारियों और कर्मचारियों का भविष्य पेंशन कोष में पांच साल से अंशदान न मिलने के कारण संकट में पड़ गया है। कोष में करीब 13 हजार करोड़ कम हैं। इस समय कोष में महज 47 सौ करोड़ ही है, जबकि इसको 18 हजार करोड़ होना था। पेंशनर संघ द्वारा लगातार प्रयास के बाद अब जाकर बिजली नियामक आयोग ने तीन सालों के लिए अंशदान तय किया है। आयोग ने ही एक साल पेंशनर कोष से 220 करोड़ निकालकर टैरिफ को कम कर दिया था।छत्तीसगढ़ राज्य के अलग बनने के बाद छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल के रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए 2001 में पेंशन ट्रस्ट बनाया गया। इसमें सबसे पहले 144 करोड़ रुपए दिए गए। जब तक विद्युत मंडल रहा, तब तक लगातार हर साल पेंशन कोष के लिए पैसे दिए जाते रहे। बाद में विद्युत मंडल के बाद जब पांच कंपनियां बनाई गई तो 2010 में होल्डिंग कंपनी ने सारी कंपनियों को कोष में पैसे देने के लिए कहा। 15-16 तक कंपनियां बकायदा जरूरत के मुताबिक कोष देती रही। लेकिन इसके बाद से कोष देना कम कर दिया गया जिसके कारण जितनी राशि पेंशनधारियों को दी जाती थी, उसे कम अंशदान के कारण अंतर बढ़ता चला गया।
टैरिफ में लगा दिए 220 करोड़
पेंशनर संघ के अध्यक्ष पीएन सिंह के मुताबिक जब नियामक आयोग की कमान डीएस मिश्रा के पास थी तो उन्होंने 2018 में पेंशन कोष से 220 करोड़ रुपए निकालकर टैरिफ में लगा दिए और टैरिफ कम किया गया। यह चुनावी साल था। इस समय कोष में 680 करोड़ थे। पेंशन कोष से पैसे लेने को लेकर आयोग में याचिका भी लगाई गई, लेकिन इसकी तीन साल तक श्री मिश्रा के अध्यक्ष रहते सुनवाई ही नहीं हुई। उनके रिटायर होने के बाद हेमंत वर्मा अध्यक्ष बने तो उन्होंने पेंशन कोष में दो सौ करोड़ वापस करवाएं। लेकिन न तो पेंशन कोष से लिए गए पैसों का ब्याज मिला, न ही बचे 20 करोड़ मिले।
हर साल 12 सौ करोड़ की जरूरत
15 हजार से ज्यादा कर्मचारियों और अधिकारियों को पेंशन देने के लिए हर साल करीब 12 सौ करोड़ खर्च होते हैं। इस समय कोष में महज 47 सौ करोड़ है। अगर आगे अंशदान नहीं मिला तो चार साल बाद पेंशन देने के लिए पैसे नहीं रहेंगे। हालांकि नियामक आयोग ने तीन सालों के लिए पॉवर कंपनी को अंशदान देने के निर्देश दिए हैं। इसके मुताबिक 2022-23 के लिए 1128 करोड़, 2023-24 के लिए 1234 करोड़ और 2024-25 के लिए 1327 करोड़ देने हैं।



