खास खबर: पहली बार फरवरी में बिजली की खपत 52 सौ मेगावाट

रायपुर। राज्य में गर्मी से पहले ही बिजली की खपत का रिकॉर्डतोड हो रही है। पहली बार फरवरी में ही खपत 52 सौ मेगावाट तक चली गई है। गर्मी में एक और नया रिकॉर्ड बनेगा और खपत के 57 से 58 सौ मेगावाट तक जाने की संभावना है। इसके पहले पिछले साल अप्रैल में खपत 53 सौ मेगावाट तक गई थी।
प्रदेश में लगातार बिजली के उपभोक्ता बढ़ रहे हैं। इस समय जहां 61 लाख से ज्यादा घरेलू और अन्य उपभोक्ता हो गए हैं, वहीं छह लाख से ज्यादा कृषि पंप हो गए हैं। ऐसे में खपत का ग्राफ भी लगातार बढ़ रहा है। कुछ साल पहले तक गर्मी और दीपावली में खपत 45 सौ मेगावाट तक जाती थी, लेकिन अब खपत पिछले दो साल से पांच हजार मेगावाट के पार होने लगी है। गर्मी में अब एसी और कूलरों ज्यादा समय तक चलगे लगे हैं, क्योंकि प्रदेश सरकार बिजली बिल हॉफ योजना में घरेलू उपभोक्ताओं का 400 यूनिट तक बिजली बिल हॉफ कर रही है। इसमें हर माह मिलने वाली छूट के कारण लोग बिजली की खपत ज्यादा करने लगे हैं।
कृषि पंपों का लोड बढ़ा
फरवरी में खपत के रिकॉर्डतोड़ होने का बड़ा कारण कृषि पंप हैं। इस समय पूरे प्रदेश में कृषि पंप चल रहे हैं। कृषि पंपों पर रोज का लोड पांच से सात सौ मेगावाट का रहता है। इसी के साथ उद्योगों में भी रोज पांच सौ मेगावाट से ज्यादा बिजली की खपत होती है। फरवरी में तापमान ज्यादा जाने के कारण एसी, कूलर भी अभी से चलने लगे है। यही वजह है कि खपत बढ़ गई है।
भरपूर बिजली की व्यवस्था
छत्तीसगढ़ राज्य पावर उत्पादन कंपनी के अपने पावर प्लांटों की क्षमता 2960 मेगावाट है। इस समय मड़वा में एक पांच सौ मेगावाट की यूनिट बंद होने के कारण अपना उत्पादन 22 से 23 सौ मेगावाट हो रहा है। मड़वा की यूनिट को कोयले की कमी के कारण बंद किया गया है। इसके जल्द प्रारंभ होने की बात की जा रही है। इसके प्रारंभ होने से अपना उत्पादन 25 से 26 सौ मेगावाट तक होगा। अभी बिजली की पूर्ति करने के लिए सेंट्रल सेक्टर से रोज 28 से 29 साै मेगावाट बिजली लेनी पड़ रही है। वैसे सेंट्रल सेक्टर से छत्तीसगढ़ का शेयर साढ़े तीन हजार मेगावाट है। इतनी बिजली वहां से ली जा सकती है।



