Environment Conservation CG: छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण बना जनआंदोलन, ‘एक पेड़ मां के नाम’ और जल संरक्षण से बदल रही तस्वीर

Environment Conservation CG:छत्तीसगढ़ में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण को केवल एक अभियान तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय से जोड़ दिया गया है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्य सरकार और आम जनता मिलकर प्रकृति को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य की नींव रखने का काम कर रहे हैं।
किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला बढ़ावा
राज्य में हरित क्षेत्र का विस्तार करने के साथ-साथ किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
- प्रमुख योजनाएं: ’हरियाली प्रसार योजना’ और ’किसान वृक्ष मित्र योजना’ के माध्यम से किसानों को कृषि वानिकी के लिए पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- आर्थिक लाभ: किसानों को अपनी भूमि पर वृक्ष लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे उन्हें दीर्घकालिक आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है।
- ‘एक पेड़ मां के नाम’: इस भावनात्मक और अनूठे अभियान के माध्यम से लाखों नागरिक अपनी मां के सम्मान में पौधारोपण कर रहे हैं, जिसने पर्यावरणीय जिम्मेदारी को एक सामाजिक आंदोलन का रूप दे दिया है।
शहरों को मिल रही है ‘हरित पहचान’
बढ़ते शहरीकरण के बीच स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है, जिसे दूर करने के लिए प्रशासन तेजी से कदम उठा रहा है।
- ऑक्सीवन योजना: इस योजना के तहत शहरों में ऑक्सीजन पार्क और नए हरित क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं।
- पर्यावरण वानिकी योजना: सड़क किनारे वृक्षारोपण, पर्यावरण पार्कों का निर्माण और सार्वजनिक स्थलों का हरित विकास किया जा रहा है, जो प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान कर रहे हैं।
जल, नदी और आर्द्रभूमि संरक्षण के अभिनव प्रयास
जलवायु परिवर्तन के इस दौर में छत्तीसगढ़ सरकार ने जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
- मोर गांव मोर पानी: ’मोर गांव मोर पानी’ और ’मोर गांव मोर तरिया’ जैसे अभियानों से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की नई चेतना पैदा हो रही है। पुराने तालाबों का पुनर्जीवन और चेक डैम का निर्माण किया जा रहा है।
- नदी तट वृक्षारोपण: नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है, जिससे मिट्टी का कटाव रुक रहा है। साथ ही, महानदी जलग्रहण क्षेत्र में आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के संरक्षण का कार्य भी तेजी से चल रहा है।
युवा पीढ़ी बनी पर्यावरण की प्रहरी
पर्यावरण संरक्षण की यह मुहिम तब तक सफल नहीं हो सकती जब तक इसमें युवाओं की भागीदारी न हो। इसी उद्देश्य से ’राष्ट्रीय हरित कोर योजना’ (नेशनल ग्रीन कॉर्प्स) और ’ईको-क्लब’ के जरिए स्कूली और कॉलेज के विद्यार्थियों को जोड़ा जा रहा है। स्वच्छता अभियान और जल संरक्षण के जरिए नई पीढ़ी को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाया जा रहा है।
पर्यावरण की रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है, क्योंकि धरती हमें विरासत में नहीं मिली है, बल्कि हमने इसे आने वाली पीढ़ियों से उधार लिया है।



