सुप्रीम कोर्ट ने कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को लगाई फटकार

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस कार्यकर्ताओं के बारे में आपत्तिजनक कार्टून सोशल मीडिया पर अपलोड करने पर फटकार लगाई है। जस्टिस सुधांशु धुलिया की अध्यक्षता वाली वेकेशन बेंच ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया जा रहा है।
कोर्ट ने हेमंत मालवीय की याचिका पर 15 जुलाई को सुनवाई करने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हेमंत मालवीय से पूछा कि आप ये सब क्यों करते हैं। तब हेमंत की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि ये कार्टून 2021 में कोरोना काल के दौरान के हैं। उन्होंने कहा कि भले ही इस कार्टून को सही नहीं ठहराया जा सकता है, लेकिन क्या ये एक अपराध है। कोर्ट कह चुकी है कि कार्टून भले ही आक्रामक हो लेकिन ये अपराध नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि कोर्ट को कानून के मुताबिक काम करना है। तब मध्यप्रदेश सरकार की ओर से पेश एएसजी केएम नटराज ने कहा कि ऐसी चीजें लगातार हो रही हैं। तब ग्रोवर ने कहा कि कार्टून से कानून-व्यवस्था की स्थिति कभी नहीं आयी।
सवाल निजी स्वतंत्रता का है कि क्या इसमें गिरफ्तार करने और हिरासत में रखने की जरूरत है। कार्टूनिस्ट मालवीय ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने 3 जुलाई को अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि ये अभिव्यक्ति की आजादी का घोर दुरुपयोग है। ग्रोवर ने कोर्ट से कहा कि मालवीय का कार्टून 2021 का कोरोना के समय का है। हाई कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि अर्नेश कुमार और इमरान प्रतापगढ़ी के बारे में सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू नहीं होगा।
ग्रोवर ने कहा कि हाई कोर्ट ने कार्टूनिस्ट की आलोचना करते हुए कहा कि इस अपराध के तहत भारतीय न्याय संहिता में अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है। कार्टूनिस्ट हेमंत मालवीय के खिलाफ इंदौर के लसूड़िया पुलिस थाने में आरएसएस के स्थानीय कार्यकर्ता और वकील विनय जोशी ने एफआईआर दर्ज करवायी थी। एफआईआर में मालवीय के खिलाफ हिंदुओं की भावनाएं आहत करने और सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश का आरोप लगाया गया है।



