सरकारी विभागों को स्मार्ट करंट, अब रिचार्ज कराने पर ही मिलेगी बिजली

खत्म होगा बकाया का झंझट
रायपुर. प्रदेशभर के सरकारी विभागों को अब बहुत जल्द स्मार्ट कंरट लगने वाला है। सरकारी विभाग राज्य बनने के बाद से ही बिजली बिल जमा करने को लेकर गंभीर नहीं रहे हैं। हमेशा से सरकारी विभाग पर करोड़ों का बकाया रहता है। इस समय भी सरकारी विभागों पर 12 सौ करोड़ से ज्यादा का बकाया है, लेकिन अब स्मार्ट मीटर लगने के बाद सरकारी विभागों को रिचार्ज कराने पर ही बिजली मिलेगी। स्मार्ट मीटर लगते ही सभी कनेक्शन प्रीपेड हो जाएंगे, क्योंकि केंद्र सरकार की इस योजना में पोस्टपेड मीटरों का प्रावधान ही नहीं है।
प्रदेश में स्मार्ट लगाने के लिए रायपुर संभाग के साथ ही बिलासपुर और अंबिकापुर संभाग का टेंडर फाइनल हो गया है। जहां रायपुर में स्मार्ट मीटर लगाने का काम टाटा कंपनी करेगी, वहीं बिलासपुर और अंबिकापुर संभाग में जीनस कंपनी स्मार्ट मीटर लगाएगी। दुर्ग और बस्तर संभाग के लिए री-टेंडर किया गया है, क्योंकि यहां पर एक ही कंपनी अदाणी ने निविदा भरी थी, इसलिए इसे रद्द कर दिया गया है।
सरकारी विभागों में पहले लगेंगे प्रीपेड मीटर
स्मार्ट मीटर योजना में सबसे पहले मीटर लगाने का काम सरकारी विभागों में किया जाएगा। इसकी शुरुआत राजधानी रायपुर से होगी। जिन भी सरकारी विभागों में स्मार्ट मीटर लगेंगे, उनको बिजली का उपयोग करने से पहले रिचार्ज कराना होगा। सारा काम क्योंकि निजी कंपनी करेगी, ऐसे में रीचार्ज करने के अलावा सरकारी विभागों के पास कोई विकल्प नहीं रहेगा, क्योंकि पोस्टपेड बिलिंग का प्रावधान ही नहीं रहेगा।
सरकारी विभागों पर बड़ा बकाया
प्रदेश में आम उपभोक्ता पर थोड़ा सा बकाया होने पर उनकी बिजली कट करने पॉवर कंपनी के कर्मचारी पहुंच जाते हैं। वहीं सरकारी विभागों की बिजली कभी कट नहीं की जाती है। यही वजह है कि सरकारी विभाग हमेशा से बेलगाम रहे हैं। ये बिल ही जमा नहीं करते। अंत में पॉवर कंपनी को प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर बजट में विभागीय बजट से ही बिलों का भुगतान लेना पड़ता है। इस समय सरकारी विभागों में सबसे बड़ा बकाया पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर 500 करोड़ से ज्यादा का है। नगरीय निकाय पर 498 कराेड़ का बकाया था, लेकिन जनवरी में राज्य सरकार से दो सौ करोड़ मिलने पर यह बकाया 298 करोड़ हो गया। इधर यह बकाया बढ़कर करीब साढ़े तीन सौ करोड़ के पार हो गया है।
इन पर कम बकाया
जहां एक तरफ सबसे ज्यादा बकाया वाले विभाग हैं, वहीं कुछ ऐेसे विभाग भी हैं, जिन पर बकाया कम है। ऐसे विभागों में सबसे कम बकाया विधि-विधायी विभाग पर 1 करोड़ 52 लाख रुपए है। इसके बाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विभाग पर 1 करोड़ 10 लाख का बकाया है। अन्य विभागों में उच्च शिक्षा पर 1 करोड़ 7 लाख, ग्रामोद्योग पर 75 लाख, सहकारिता विभाग पर 63 लाख के साथ ही कई विभागों पर एक से 25 लाख तक का बकाया है।
ये हैं बड़े बकायेदार
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग 500 करोड़ से ज्यादा
नगरीय निकाय एवं विकास विभाग 350 करोड़ से ज्यादा
स्कूल शिक्षा विभाग 65 करोड़
चिकित्सा विभाग 55 करोड़
पुलिस विभाग 25 करोड़
जल संसाधन विभाग 20 करोड़
आवास एवं पर्यावरण 11 करोड़
महिला एवं बाल विकास 14 करोड़
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन 10.17 करोड़
वन विभाग 7 करोड़
आदिम जाति विभाग 5 करोड़
लोक निर्माण विभाग 7.55 करोड़



