लोड फैक्टर का बड़ा खेल, घरेलू से स्टील उद्योग को सस्ती बिजली, पॉवर कंपनी को लगेगा हजार करोड़ का फटका

रायपुर(realtimes) कहते हैं वास्तव में गरीब का कोई नहीं होता है। सबसे ज्यादा लूटने का काम आम आदमी काे ही किया जाता है। यह बात अब बिजली की खपत में भी साबित हो रही है। घरेलू उपभोक्ता अगर एक माह में 400 यूनिट से ज्यादा की खपत करते हैं तो उनको सात रुपए प्रति यूनिट के देने पड़ते हैं। आगे अगर खपत 600 यूनिट से बढ़ गई काे यह कीमत 9 रुपए के आस-पास चली जाती है, लेकिन हर माह लाखों यूनिट खपत करने वाले स्टील उद्योग को घरेलू से भी सस्ती दर पर बिजली मिल रही है। यह काे सीधे-सीधे कारोबार है, लेकिन इसके बाद भी इस पर मेहरबानी की गई है। लोड फैक्टर का ऐसा खेल खेला गया है जिसके कारण स्टील उद्योग को 6.10 रुपए टैरिफ वाली बिजली 4.58 यूनिट में मिल रही है। इसकी वजह से पॉवर कंपनी को इस सत्र में करीब हजार करोड़ का घाटा होने वाला है। इस घाटे की भरपाई भी आने वाले समय में बिजली की कीमत बढ़ाकर आम उपभोक्ताओं से ही होगी।
प्रदेश में स्टील उद्योग ऐसा है जो सबसे ज्यादा बिजली खरीदता है। उद्योग हमेशा से ही बिजली महंगी होने का रोना रोते रहता है। सरकार के पास उद्योगों के बंद होने की गुहार लगाकर कई बार ऊर्जा शुल्क में छूट भी ले ली गई है। लेकिन इस बार तो लोड फैक्टर का ऐसा खेल हो गया है जिसके कारण स्टील उद्योग की पूरी चांदी हो गई है। हालांकि स्टील उद्योग से जुड़े कारोबारी इस बात काे नकारते हैं कि उनको फायदा हो रहा है। इनका कहना है उनकाे सभी शुल्क मिलाकर बिजली छह रुपए प्रति यूनिट पड़ती है. अगर इनकी बात मान ली जाए ताे भी इनकी बिजली तो घरेलू बिजली से सस्ती ही हुई, क्योंकि 400 यूनिट से ज्यादा खपत करने पर सात रुपए देने पड़ते हैं।
छूट में कर दिया 17 फीसदी का इजाफा
स्टील उद्योग के लिए एक लोड फैक्टर तय है। जिस प्लांट ने जितने किलो वाॅट का कनेक्शन लिया है, उसमें लोड के उपयोग के अनुसार उसके टैरिफ में प्रतिशत कम किया जाता है। पिछले साल यह 63 से 70 प्रतिशत था। यानी 64 प्रतिशत का उपयोग करने वालों को टैरिफ में एक प्रतिशत की छूट मिली, इसी तरह से 70 फीसदी तक उपयोग करने वालों को 8 फीसदी छूट मिली। लेकिन इस बार इसमें खेल करते हुए इसको 50 से 75 प्रतिशत करके 25 फीसदी तक छूट का प्रावधान कर दिया गया है।
6.10 रुपए की बिजली मिल रही 4.58 रुपए में
बड़े उद्योगों का जितने मेगावाट का कनेक्शन है, उसका आसानी से ये 70 से 75 फीसदी तक उपयोग कर लेते हैं। 75 फीसदी उपयोग का मतलब यह है कि 6.10 प्रति यूनिट का टैरिफ सीधे-सीधा 25 फीसदी छूट के कारण 1.52 रुपए कम होकर 4.58 रुपए हो जाना। यही हो रहा है जिसके कारण स्टील उद्योगों को सस्ती कीमत पर बिजली मिल रही है। जिनका उपयोग 60 फीसदी होता है उनको दस फीसदी का फायदा मिल रहा है।
टीओडी में भी 31 पैसे प्रति यूनिट का फायदा
स्टील उद्योग को टैरिफ में लाेड फैक्टर के कारण तो फायदा हो रहा है, लेकिन इसी के साथ टीओडी टैरिफ में भी इसको पांच फीसदी का फायदा हो रहा है जिसके कारण प्रति यूनिट 31 पैसे और कम हो जाते हैं। पिछले साल यह दो फीसदी था। हालांकि 375 रुपए प्रति किलो वॉट का शुल्क लगने के कारण 69 पैसे प्रति यूनिट की कीमत बढ़ भी जाती है। इस बढ़ी कीमत और टैरिफ को मिला दें तो प्रति यूनिट कीमत 6.79 रुपए होती है। और लोड फैक्टर के साथ टीओडी की छूट को मिलाएं तो 1.83 रुपए प्रति यूनिट पर कम हो जाते हैं। यानी 6.79 रुपए यूनिट वाली बिजली स्टील उद्योगों को फिक्स चार्ज मिलाकर पांच रुपए यूनिट में मिल जा रही है।
गड़बड़ी रोकने वाली याचिका की खारिज
रिटायर इंजीनियर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष और नियामक आयोग के पूर्व सचिव पीएन सिंह, का कहना है, स्टील उद्योग को फायदा पहुंचाने के लिए की जाने वाली गड़बड़ी को रोकने के लिए दस्तावेजों के साथ बिजली नियामक आयोग में टैरिफ तय होने से पहले याचिका लगाई थी, लेकिन हमारी याचिका दरकिनार करके नया लोड फैक्टर तय करके स्टील उद्योग काे सस्ती बिजली देने का रास्ता खाेल दिया गया।



