रियल टाइम्स की खबर का असर: बिजली के तार अंडरग्राउंड करने वाले टेंडर काे लगा तगड़ा झटका, पॉवर कंपनी ने किया रद्द

रायपुर(realtimes) टेंडरों काे अबब में भरवाकर किस तरह से बड़ा खेल कई विभागाें में चल रहा है, उसका एक बड़ा उदाहरण छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी में सामने आया है, लेकिन इस टेंडर काे दमदारी से रद्द भी करने का काम किया गया है। दरअसल में शहर के कई मार्गों के बिजली के तारों को अंडरग्राउंड करने वाला टेंडर भरने वाली तीन कंपनियों ने इसकाे अबब रेट में भरा और एक कंपनी के टेंडर काे अबब रेट में मंजूरी दिलाने के लिए जब छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी के वित्त विभाग को भेजा गया तो इस खबर को रियल टाइम्स ने अपने 12 सितंबर काे प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद अब टेंडर को रद्द कर दिया गया है। अब नए सिरे से टेंडर होगा और जितने का काम है उतने का ही टेंडर मंजूर किया जाएगा।
राजधानी रायपुर के ज्यादातर मार्गों में बिजली के तारों का जाल बिछा हुआ है। इसकी वजह से बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर बाजारों के तारों से ज्यादा परेशानी होती है। करीब डेढ़ दशक पहले बाजारों को तारों से मुक्त करने की योजना बनाई गई, लेकिन यह योजना पूरी नहीं हो सकी। अब एक बार फिर से योजना बनाई गई है। इस बार योजना के पूरे होने की संभावना है, लेकिन इसमें भी अब एक बड़ा पेंच टेंडर में गड़बड़ी का फंस गया और अंतत: इसको रद्द कर दिया गया है। एक बार पहले ही योजना की लागत में छह करोड़ का इजाफा होने के बाद टेंडर किया गया। टेंडर को योजना में तय 31 करोड़ की लागत से ज्यादा का भरने वाली कंपनी का टेंडर फाइनल करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी के वित्त विभाग के पास भेजा गया तो अबब रेट वाले टेंडर को लेकर गड़बड़ी की आशंका में जांच प्रारंभ की गई और इसमें आशंका सही पाई गई कि किसी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए ही अबब रेट वाले टेंडर को फाइनल कराने की तैयारी है, ऐसे में वित्त विभाग ने टेंडर को मंजूरी देने से इनकार कर दिया।
जांच में टेंडर में मिली गड़बड़ी
31 करोड़ की योजना का टेंडर करने के बाद टेंडर को अबब में भरने वाली प्रदेश की ही एक कंपनी को देने की तैयारी थी। तीन कंपनियों ने योजना में टेंडर भरा था। बताया जा रहा है, सभी कंपनियों का रेट अबब में भरा गया। ऐसे में जिस कंपनी का सबसे कम अबब वाला रेट था, उस कंपनी का टेंडर फाइनल करने के लिए टेंडर को पॉवर कंपनी के वित्त विभाग के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है। अबब वाले टेंडर को मंजूरी के लिए भेजने पर वित्त विभाग को हैरानी और गड़बड़ी की आशंका भी हुई। इस मामले जांच करने का फैसला किया गया और जांच करने पर पाया गया कि किसी एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा किया जा रहा है, इसलिए वित्त विभाग ने टेंडर को मंजूर करने के स्थान पर रद्द कर दिया। पॉवर कंपनी के अधिकारियों का कहना है, टेंडर भरने वाले सिंडीकेट बनाकर काम करते हैं और अबब में रेट भर देते हैं, इसके बाद दबाव बनाकर टेंडर मंजूर करवाने का भी काम करते हैं। यही वजह है कि इस टेंडर को मंजूर नहीं किया गया।



