पापाराव के सरेंडर से खत्म नहीं हुआ माओवाद, देशभर में अब भी 100 से ज्यादा कैडर सक्रिय - realtimes
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पापाराव के सरेंडर से खत्म नहीं हुआ माओवाद, देशभर में अब भी 100 से ज्यादा कैडर सक्रिय

अधिकारियों के मुताबिक 1 जनवरी 2024 से अब तक छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में 2,756 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

रायपुर। छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों में नक्सलवाद के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान अब निर्णायक दौर में पहुंचता दिख रहा है। बुधवार को साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े सीनियर माओवादी कमांडर पापाराव उर्फ अशोक ने आधिकारिक रूप से आत्मसमर्पण कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियां इसे माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका मान रही हैं। हालांक, जानकारों का कहना है कि राज्य में अब भी तीन दर्जन से अधिक नक्सली कैडर सक्रिय हैं।

बुधवार को आत्मसमर्पण करने वालों में साउथ सब जोनल ब्यूरो प्रभारी एसजेडसीएम पापाराव के अलावा कई वरिष्ठ कैडर शामिल हैं, जिन पर कुल 87 लाख रुपए का इनाम घोषित था। इन्होंने प्रशासन की “पूना मार्गम – पुनर्वास के माध्यम से पुनर्समावेशन” पहल के तहत आत्मसमर्पण किया है। इनमें सात महिलाएं भी शामिल हैं। सरेंडर के दौरान कैडरों ने 18 हथियार और 12 लाख रुपए नकद भी जमा कराए। बरामद हथियारों में 8 एके-47, 1 एसएलआर, 1 इंसास राइफल, 4 .303 राइफल, 1 पिस्टल, 2 सिंगल-शॉट हथियार और 1 बीजीएल लॉन्चर शामिल हैं।

अधिकारियों के मुताबिक 1 जनवरी 2024 से अब तक छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में 2,756 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इससे पहले डीवीसीएम अनिल ताती और डीवीसीएम प्रकाश माड़वी जैसे सीनियर कैडर भी माओवादी संगठन छोड़ चुके हैं। सरकार का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को निर्धारित नीति के तहत सुरक्षा, आर्थिक सहायता, आवास, शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार की सुविधा दी जाएगी, ताकि उनका सम्मानजनक पुनर्वास हो सके।

पापाराव को छत्तीसगढ़ में आखिरी सीनियर कमांडर बताया जा रहा है। हालांकि जानकारों का कहना है कि अभी भी करीब 40 माओवादी कैडर छत्तीसगढ़ में सक्रिय हैं। उधर, झारखंड में करीब 70 कैडर मिसिर बेसरा के नेतृत्व में सक्रिय हैं और लगातार आईईडी लगाकर हमले कर रहे हैं। तेलंगाना में करीब 10 और ओडिशा में लगभग 10 कैडर सक्रिय बताए जा रहे हैं। यानी देशभर में अब भी 130 से अधिक नक्सल कैडर सक्रिय हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या 31 मार्च तक बाकी बचे माओवादी कैडर भी आत्मसमर्पण करेंगे। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लगातार दावा कर रहे ह कि 31 मार्च से देश नक्सलमुक्त हो जाएगा। ऐसे में अब यह देखनमोड़ पर होगा कि अगले एक हफ्ते में शेष कैडर भी मुख्यधारा में लौटते हैं या फिर अभियान आगे और तेज किया जाएगा।

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