खास खबर: दस्तावेजों में फंसी तकनीकी बीड की जांच, स्मार्ट मीटर का रेट टेंडर रद्द होने का खतरा भी  - realtimes
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खास खबर: दस्तावेजों में फंसी तकनीकी बीड की जांच, स्मार्ट मीटर का रेट टेंडर रद्द होने का खतरा भी 

रायपुर. प्रदेश में लगने वाले स्मार्ट मीटर के लिए खुले तकनीकी बीड की जांच दस्तावेजों में फंस गई है। सभी कंपनियों के दस्तावेजों में कमी होने के कारण कंपनियों से दस्तावेज मंगाए जा रहे हैं। यही वजह है कि एक माह बाद भी जांच का काम पूरा नहीं हो सका है। नए तरह के काम का टेंडर होने के कारण टेंडर करने वाली कंपनी के साथ टेंडर भरने वाली कंपनियां भी उलझ गई हैं। इसकी वजह से रेट का टेंडर भी अटक गया है। इसको फरवरी के अंत में खोलने की तैयारी थी। अब एक संभावना इस बात की भी है कि टेंडर रद्द भी हो सकता है। ऐसा होने पर री-टेंडर किया जाएगा।
प्रदेश में 56 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं के मीटरों को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य पाॅवर कंपनी ने पांच संभागों को तीन हिस्सों में बांटकर टेंडर किया है। इसका तकनीकी बीड 31 जनवरी को खोला गया था। उसमें जो पांच कंपनियां सामने आईं हैं, उसमें सबसे बड़ी कंपनी के रूप में अडानी की कंपनी है। इस कंपनी ने सभी संभागों का चार हजार करोड़ का टेंडर भरा है। एक बड़ी नामी कंपनी टाटा ने भी टेंडर भरा है, लेकिन टाटा ने महज रायपुर संभाग के टेंडर में ही रुचि दिखाई है। इसी के साथ तीन और कंपनियों ने भी टेंडर भरा है। अब सभी कंपनियों को तकनीकी बीड पर परखा जा रहा है। ऐसे में सभी कंपनियों के कुछ न कुछ दस्तावेज कम होने पर कंपनियों से दस्तावेज मंगाने का काम चल रहा है। ऐसे में जांच का काम लंबा खींच रहा है। जांच में जो कंपनियां पात्र मिलेंगी उनका रेट खोलकर इस माह टेंडर को फाइनल करने की तैयारी है। अधिकारी इस बात की भी संभावना जता रहे हैं कि संभव है, कोई भी कंपनी तकनीकी बीड में पात्र न हो, क्योंकि नए तरह का टेंडर होने के कारण इसको समझने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।टेंडर तीन हिस्सों में

टेंडर को पॉवर कंपनी ने प्रदेश के पांच संभागों के हिसाब से किया है, क्योंकि एक साथ चार हजार करोड़ का टेंडर करने पर ज्यादा कपंनियां के आने की संभावना नजर नहीं आ रही थी। इसी के साथ अलग-अलग हिस्सों में टेंडर करने के काम भी तेजी से होगा। रायपुर संभाग बड़ा होने के कारण उसको अलग संभाग रखा गया है और इसका टेंडर 16 सौ करोड़ का है। इसी के साथ दुर्ग संभाग के साथ बस्तर संभाग को मिलाया गया है। इसका टेंडर भी 16 सौ करोड़ का है। बिलासपुर और अंबिकापुर संभाग को मिलाकर एक पैकेज किया गया है। इसका टेंडर आठ सौ करोड़ का है।

दौड़ में पांच कंपनियां

कुल मिलाकर पांच संभागों के तीन पैकेज के लिए पांच कंपनियां ने टेंडर भरा है। रायपुर संभाग का टेंडर अडानी और टाटा के अलावा तीन और कंपनियों इन टेली स्मार्ट, हाई प्रिंट एनर्जी और एनसीएल ने भरा है। बस्तर और दुर्ग का अडानी के अलावा एक और कंपनी ने और बिलासपुर और अंबिकापुर का अडानी के अलावा दो और कंपनियों ने टेंडर भरा है। अगर तकनीकी बीड में तीनों पैकेजों में अडानी की कंपनी पात्र हो जाती है और उसका रेट भी एल वन होगा तो उनको पूरे प्रदेश में मीटर लगाने का काम मिल सकता है। रायपुर संभाग में अगर टाटा कंपनी एल वन हो गई तो उसके हिस्से में टेंडर जा सकता है। इसी के साथ दूसरी कंपनियां भी दौड़ में शामिल हैं। जिनका रेट एल वन होगा उसको काम मिलेगा। लेकिन अभी रेट का टेंडर खोलने में समय लगेगा। तकनीकी बीड का काम पूरा हाेने पर ही इसको खोला जाएगा।

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