वीसीए पर अब नियंत्रण नहीं, काेयले की कीमत के हिसाब से बढ़ेंगे अब बिजली के दाम - realtimes
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वीसीए पर अब नियंत्रण नहीं, काेयले की कीमत के हिसाब से बढ़ेंगे अब बिजली के दाम

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ के इतिहास में ऐसा पहली बार हाेगी कि बिजली की कीमत साल में कम से कम आधा दर्जन बार बढ़ जाएगी। दरअसल अब काेयले की कीमत के हिसाब से हर दाे माह में बिजली के दाम तय हाेंगे। कोयले के बढ़ते दाम के कारण छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी को इस समय एनटीपीसी से ज्यादा कीमत पर बिजली लेनी पड़ रही है। ऐसे में दो माह से लिए वीसीए 23 पैसे बढ़ाया गया है। इस समय वीसीए 42 पैसे प्रति यूनिट हो गया है। अक्टूबर में फिर से उत्पादन लागत की समीक्षा होगी, तब भी कोयले की कीमत के कारण अगर उत्पादन लागत ज्यादा रही तो वीसीए में फिर इजाफा होगा।

बिजली नियामक आयोग ने पहले वीसीए को दाे सौ यूनिट तक खपत करने वालों के लिए टैरिफ का पांच प्रतिशत वीसीए लगाने की सीमा तय की थी, लेकिन इस बार के टैरिफ में वीसीए को नियंत्रण से बाहर रखा गया है। चूंकि साल में टैरिफ एक ही बार तय किया जा सकता है, ऐसे में लागत बढ़ने पर वीसीए को बढ़ाना ही एकमात्र विकल्प है। अगर कोयले की कीमत इसी तरह से बेलगाम रही तो हर दो माह में महंगी बिजली का झटका लगना तय है।

उत्पादन लागत से तय हाेगी कीमत

कोयले की कीमत के साथ बिजली के उत्पादन में लगने वाले फ्यूल और अन्य खर्च काे मिलाकर उत्पादन लागत निकाली जाती है। हर दो माह में उत्पादन लागत का आकलन करके वीसीए तय किया जाता है। पॉवर कंपनी को एनटीपीसी से बिजली लेने में ज्यादा पैसे भी लग रहे हैं, क्योंकि एनटीपीसी की बिजली महंगी हो गई है। इस माह कंपनी को करीब 160 करोड़ रुपए का ज्यादा भुगतान एनटीपीसी को करना पड़ रहा है। हर माह कंपनी एनटीपीसी से 11 से 12 सौ मिलियन यूनिट बिजली लेती है। ऐसे में वीसीए में दो माह के लिए इजाफा किया गया है। यह इजाफा अगस्त और सितंबर के बिल में होगा। अक्टूबर में फिर से उत्पादन लागत की समीक्षा होगी, अगर लगेगा कि उत्पादन लागत बढ़ गई है तो फिर से वीसीए में इजाफा होगा।

वीसीए पर अब नियंत्रण नहीं

बिजली नियामक आयोग जब नए टैरिफ का फैसला करता है तो वीसीए पर भी फैसला होता है। इसके पहले जब टैरिफ तय किया गया तो इसमें वीसीए को लेकर यह तय किया गया था कि कम खपत करने वालों को कम वीसीए लगेगा, तब स्थिति अलग थी, तब उत्पादन लागत कम थी, लेकिन अब सेंट्रल सेक्टर से मिलने वाली बिजली की उत्पादन लागत ज्यादा हो गई है। इसी के साथ उत्पादन संयंत्रों के लिए विदेशी कोयले की बाध्यता हो गई है। इसी वजह से उत्पादन लागत में इजाफा हो रहा है। इसी को देखते हुए ही वीसीए को नियंत्रण से बाहर रखा गया है, ताकि उत्पादन लागत ज्यादा बढ़ जाए तो वीसीए में इजाफा करके इसको संतुलित किया जा सके।

400 यूनिट पर आधा लगेगा वीसीए

वीसीए में भले 23 पैसे प्रति यूनिट का इजाफा किया गया है, लेकिन 400 यूनिट तक उपभोक्ताओं को इसका आधा साढ़े 11 पैसे ही प्रति यूनिट पर देने होंगे। बिजली बिल हॉफ योजना में टैरिफ के साथ वीसीए भी शामिल रहता है। ऐसे में वीसीए में जितना भी इजाफा होगा, उसका उपभोक्ताओं को चार सौ यूनिट तक आधा पैसा ही देना होगा, ऐसे में उपभोक्ताओं पर ज्यादा भार नहीं पड़ेगा।

एनटीपीसी की बिजली महंगी

पॉवर कंपनी को ज्यादातर बिजली एनटीपीसी से खरीदनी पड़ती है। हर माह 11 से 12 सौ मिलियन यूनिट बिजली ली जाती है। इसका बिल आमतौर पर 400 से 450 करोड़ आता है, लेकिन इस बार अगस्त माह का बिल 610 करोड़ आया है, यानी 160 करोड़ ज्यादा देने पड़ रहे हैं। आने वाले माह में यह बिल 640 करोड़ तक जाएगा। एनटीपीसी की बिजली महंगी होने के पीछे का कारण विदेशी कोयला है। एनटीपीसी में 10 से 15 फीसदी विदेशी कोयले का उपयोग हो रहा है। यह कोयला महंगा होने के कारण बिजली की उत्पादन लागत बढ़ गई है।

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