छत्तीसगढ़ पर अब बिजली संकट का बड़ा खतरा

रायपुर(realtimes) सरप्लस बिजली के राज्य के रूप में जाने जाने वाले छत्तीसगढ़ पर भी अब बिजली संकट का खतरा मंडराने लगा है। दरअसल अब केंद्र सरकार के सेंट्रल सेक्टर ग्रिड से बिजली लेने के लिए तय किए गए नए नियम से अब छत्तीसगढ़ में कभी भी बिजली का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है। इस माह के पहले सप्ताह में ही बिजली संकट आया जिसके कारण उद्योगों की बिजली कट करनी पड़ी। अब तक सेंट्रल सेक्टर से जरूरत पड़ने पर तीन हजार मेगावाट से ज्यादा बिजली लेने की आजादी थी, लेकिन अब वहां से 2530 मेगावाट का कोटा फिक्स हो गया है। हालांकि पॉवर कंपनी इस प्रयास में लगी है कि यह कोटा बढ़कर कम से कम तीन हजार मेगावाट हो जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर बिजली संकट गहराना तय है।
छत्तीसगढ़ राज्य पावर उत्पादन कंपनी की अपने बिजली संयंत्रों में 2960 मेगावाट की उत्पादन क्षमता है। लेकिन किसी भी संयंत्र में सौ फीसदी उत्पादन नहीं होता है। अगर सभी संयंत्रों में पूरी क्षमता से उत्पादन लेने का प्रयास होगा तो 27 सौ मेगावाट तक ही उत्पादन होगा। इसी के साथ एक बात यह भी है कि संयंत्रों में खराबी भी आती रहती है, इसके अलावा रखरखाव के लिए भी यूनिटों को बंद किया जाता है। ऐसे में अपना उत्पादन आमतौर पर 22 से 25 मेगावाट के आस-पास ही होता है।
पहली बार कोटा फिक्स
पावर कंपनी का अपना उत्पादन कम होने के बाद भी प्रदेश में कभी बिजली संकट की स्थिति नहीं रही है, क्योंकि जब भी बिजली की जरूरत पड़ी है तो सेंट्रल सेक्टर से तीन हजार मेगावाट से ज्यादा बिजली ली गई है। 35 सौ मेगावाट तक बिजली लेकर भी पूर्ति करने का काम हुआ है। इस साल तो खपत रिकॉर्ड छह हजार मेगावाट के पार गई है, लेकिन इसके बाद भी कटौती की स्थिति नहीं आई, लेकिन अब यह स्थिति रहने वाली नहीं है, क्योंकि एक अक्टूबर से नए नियम के तहत अब सेंट्रल सेक्टर से 2530 मेगावाट का कोटा तय हो गया है। इससे ज्यादा बिजली सेंट्रल सेक्टर से नहीं मिलेगी।
खपत कम होने से नहीं होगी परेशानी
अभी तो बारिश के बाद ठंड के मौसम प्रारंभ हो रहा है, ऐसे में अभी परेशानी नहीं होगी, क्योंकि अब खपत पांच हजार मेगावाट से कम ही रहेगी, लेकिन अगले साल गर्मी में जरूर बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है। ऐसे में पॉवर कंपनी को अपने राज्य के निजी पावर सेक्टर से बिजली लेने पर फोकस करना होगा। अपना उत्पादन 25 से 26 सौ मेगावाट और सेंट्रल सेक्टर से 25 साै मेगावाट बिजली मिलने पर पांच हजार मेगावाट बिजली हो हो सकेगी। खपत छह हजार तक गई तो एक हजार मेगावाट की कमी होगी। इसकी व्यवस्था न होने पर कटौती भी संभव है।



