national
चुनावी बॉन्ड: सुप्रीम कोर्ट ने SBI को लगाई फटकार, जानिए क्यों

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को चुनावी बॉन्ड से जुड़ी जानकारी को लेकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि बैंक ने चुनावी बॉन्ड का पूरा डेटा सार्वजनिक नहीं किया और यूनिक नंबर भी जारी नहीं किए।
क्या हुआ?
- सुप्रीम कोर्ट ने SBI को चुनावी बॉन्ड का पूरा डेटा सार्वजनिक करने का आदेश दिया था।
- बैंक ने 2 सूचियां जारी कीं – एक में बॉन्ड खरीदने वाली कंपनियों की जानकारी और दूसरी में बॉन्ड भुनाने वाली राजनीतिक पार्टियों के नाम।
- बैंक ने बॉन्ड का यूनिक नंबर जारी नहीं किया, जिससे ये पता नहीं चल रहा है कि किस कंपनी ने किस पार्टी को कितना चंदा दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
- “हमने आदेश दिया था कि आप पूरा डाटा सार्वजनिक करेंगे, लेकिन आपने पूरा डाटा नहीं दिया। आपने बॉन्ड नंबर नहीं बताए हैं।”
- “वास्तव में कहें तो SBI ने जो खुलासा किया है, हम उस पर आपत्ति जता सकते हैं। आपने हमारे आदेश के बाद भी यूनिक नंबर क्यों सार्वजनिक क्यों नहीं किए?”
कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
- SBI को चुनावी बॉन्ड का पूरा डेटा सार्वजनिक करने का निर्देश दिया।
- हर बॉन्ड पर छपे यूनिक नंबर भी जारी करने का आदेश दिया।
- मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को होगी।
चुनावी बॉन्ड क्या है?
- चुनावी बॉन्ड एक सादा कागज होता था, जिस पर नोटों की तरह उसकी कीमत छपी होती थी।
- इसे कोई भी व्यक्ति या कंपनी खरीदकर अपनी मनपंसद राजनीतिक पार्टी को चंदे के तौर पर दे सकती थी।
- बॉन्ड खरीदने वाले की जानकारी केवल SBI के पास रहती थी।
क्यों जरूरी है यूनिक नंबर?
- यूनिक नंबर से ये पता चल सकेगा कि किस कंपनी ने किस पार्टी को कितना चंदा दिया।
- इससे चुनावी चंदे में पारदर्शिता आएगी।
क्या है आगे का रास्ता?
- SBI को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए चुनावी बॉन्ड का पूरा डेटा सार्वजनिक करना होगा।
- यूनिक नंबर जारी होने से चुनावी चंदे में पारदर्शिता आएगी।

