
रायपुर(realtimes) प्रदूषण से मुक्ति के लिए ई-बाइक, ई रिक्शा ताे आ गए हैं, लेकिन राजधानी रायपुर में सबसे बड़ी समस्या यह है कि कहीं भी एक भी चार्जिंग स्टेशन नहीं है। ऐसे में ई-रिक्शा वालाें काे बैटरी समाप्त हाेने पर मजबूरी में अपने घर लाैटना पड़ता है।। कई बार ई-रिक्शा काे धक्के मारकर ले जाना पड़ता है। इस समय आठ हजार से ज्यादा ई-रिक्शा चल रहे हैं, इनकाे चार्जिंग स्टेशन न होने के कारण आटो चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इधर हर माह अब 400 ई-रिक्शा बिक रहे हैं, जबकि पेट्रोल वाले आटो अब महज 30 से 40 बिक रहे हैं, पहले सभी यही आटो बिकते थे। लेकिन अब इनकी तरफ रूझान कम हो गया है।
पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों और प्रदूषण के कारण अब आटाे चालकों ने इनके स्थान पर ई ई-रिक्शा लेना प्रारंभ कर दिया है। आज स्थिति यह हाे गई है राजधानी रायपुर में करीब आधे ई-रिक्शा हो गए हैं। दो साल पहले रायपुर में आटो की संख्या 13 हजार के आस-पास थी, अब इसमें से आठ हजार ई-रिक्शा हो गए हैं। डीजल वाले आटो पर प्रतिबंध होने के कारण अब इसकी जहां बिक्री नहीं हो रही है वहीं जो पुराने डीजल आटो हैं, उनकी अवधि समाप्त होने पर आटो चालक उसके स्थान पर या तो ई-रिक्शा ले रहे हैं या फिर एलपीजी वाले आटो ले रहे हैं।
एक भी चार्जिंग स्टेशन नहीं
शहर में आठ हजार ई-रिक्शा होने के बाद भी पूरे शहर में एक भी चार्चिंग स्टेशन नहीं है। अब तक किसी निजी कंपनी और सरकारी एजेंसी ने भी इसके लिए प्रयास नहीं किया है। स्मार्ट सिटी ने 40 चार्जिंग स्टेशन बनाने की योजना तैयार की थी, इसके लिए टेंडर भी किया गया, लेकिन यह योजना भी अब तक धरातल पर नहीं उतरी है। नगर निगम रायपुर ने भी चार्चिंग स्टेशन काे याेजना बनाई है, लेकिन अभी इसका आगाज नहीं हाे सका है। ऐसे में आटो चालकों को बहुत ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ई-रिक्शा चालक बताते हैं, उनका अपना आटो रोज घर से ही चार्ज करके निकलना पड़ता है। एक बार चार्ज करने पर यह 80 से 100 किलो मीटर तक चलता है, उसके बाद घर वापस जाना पड़ता है।
खोले जाएं चार्जिंग स्टेशन
आटो चालक संघ के कमल पांडेय का कहना है, राजधानी में ज्यादा से ज्यादा स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन होने चाहिए। हर पेट्रोल पंप के साथ जितने स्थानों पर शहर में आटो स्टैंड हैं, वहां पर भी चार्जिंग स्टेशन की सुविधा होनी चाहिए। ऐसा होने से ई-रिक्शा की संख्या में और इजाफा होगा। इसी के साथ एलपीजी पंप भी शहर में कम से कम चार स्थानों पर होने चाहिए अभी एक ही पंप विधानसभा रोड में होने के कारण भारी परेशानी होती है। कम से कम टाटीबंध, भनपुरी और धमतरी रोड में एक-एक एलपीजी पंप खोले जाने चाहिए। श्री पांडेय का कहना है सीएनजी को लेकर भी प्रदेश सरकार को प्रयास करना चाहिए। सीएनजी के पंप होने पर इसके आटो भी बिकेंगे और प्रदूषण से मुक्ति भी मिलेगी।
ज्यादा बिक रहे ई-आटो
जीके हाेंडा के संचालक पुनीत पारवानी का कहना है, रायपुर में पहले 150 से 160 पेट्रोल और डीजल वाले आटो बिकते थे, लेकिन अब ये महज 30 से 40 ही बिक रहे हैं जबकि ई-रिक्शा हर माह रायपुर में जहां 20 से 250 बिक रहे हैं, वहीं पूरे राज्य में 400 बिक रहे हैं।



