उद्योग और खाद्य विभाग के बीच डेटा इंटीग्रेशन: राशन दुकानों के लाइसेंस की निगरानी होगी और सख्त

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रायपुर( realtimes)
छत्तीसगढ़ सरकार उचित मूल्य (राशन) दुकानों की निगरानी और नियमन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक नया कदम उठाने जा रही है। राज्य के उद्योग संचालनालय और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के बीच एपीआई (API) इंटीग्रेशन की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसके तहत राशन दुकानों के “ऑपरेशन सर्टिफिकेट” यानी संचालन प्रमाणपत्र को डिजिटल रूप से जोड़ा जाएगा। इससे राशन दुकानों के लाइसेंस, उनके नवीनीकरण और संचालन की स्थिति की जानकारी विभिन्न विभागों के बीच स्वतः साझा हो सकेगी।
खाद्य विभाग के संचालक ने 11 मई 2026 को सभी कलेक्टरों को पत्र जारी कर उद्योग संचालनालय के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई करने को कहा है। यह पत्र उद्योग संचालनालय द्वारा 29 अप्रैल 2026 को भेजे गए प्रस्ताव के आधार पर जारी किया गया है।
आखिर क्या है मामला?
दस्तावेज के अनुसार उद्योग संचालनालय ने “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” (EoDB) के तहत संचालित ऑनलाइन प्रणाली में राशन दुकानों के ऑपरेशन सर्टिफिकेट को शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए खाद्य विभाग के साथ एपीआई इंटीग्रेशन की आवश्यकता बताई गई है।
सरल शब्दों में कहें तो अब यदि किसी उचित मूल्य दुकान का संचालन प्रमाणपत्र जारी होता है, नवीनीकृत होता है या उसकी स्थिति में कोई बदलाव आता है, तो यह जानकारी संबंधित विभागों के डिजिटल पोर्टल पर स्वतः उपलब्ध हो सकेगी। इसके लिए खाद्य विभाग से राशन दुकानों का अद्यतन (लेटेस्ट) डेटा मांगा गया है।
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से क्या संबंध?
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न अनुमतियों, लाइसेंसों और प्रमाणपत्रों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश कर रही हैं। इसका उद्देश्य कारोबार से जुड़े लोगों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से बचाना और विभागों के बीच डेटा साझा करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
छत्तीसगढ़ में भी उद्योग विभाग “सिंगल विंडो सिस्टम” और ऑनलाइन अनुमति व्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रहा है। राशन दुकानों के संचालन प्रमाणपत्र को इस प्रणाली से जोड़ने से प्रमाणपत्रों के सत्यापन, नवीनीकरण और निगरानी की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सकती है।
राशन व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होती है तो उचित मूल्य दुकानों से संबंधित रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण और सत्यापन आसान होगा। इससे निष्क्रिय, बंद या नियमों का पालन नहीं करने वाली दुकानों की पहचान तेजी से की जा सकेगी। साथ ही जिलों और राज्य स्तर पर निगरानी तंत्र भी मजबूत होगा।
हालांकि दस्तावेज में सीधे तौर पर किसी नई नीति या लाइसेंस शर्त का उल्लेख नहीं है, लेकिन विभागीय पत्राचार से स्पष्ट है कि सरकार राशन दुकानों से जुड़े प्रमाणपत्रों और डेटा को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
कलेक्टरों को दिए गए निर्देश
खाद्य विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को उद्योग संचालनालय के पत्र के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही खाद्य नियंत्रकों और खाद्य अधिकारियों को भी इस संबंध में आगे की प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है।
व्यापक डिजिटल सुधारों का हिस्सा
यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब छत्तीसगढ़ सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) को पूरी तरह डिजिटल बनाने, हितग्राहियों के सत्यापन, ऑनलाइन निगरानी और डेटा-आधारित प्रशासनिक निर्णयों पर जोर दे रही है। उद्योग विभाग और खाद्य विभाग के बीच एपीआई इंटीग्रेशन को इसी व्यापक डिजिटल सुधार अभियान की एक कड़ी माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी, तेज और जवाबदेह बनाना है।




