खबर का असर: पंचायत विभाग का 750 करोड़ बकाया राज्य सरकार ने चुकाया

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ सरकार के सरकारी विभाग अब तक बिजली बिल जमा करने के मामले में बेलगाम हैं। राज्य पावर कंपनी काे सरकारी विभाग ही हर साल दाे हजार कराेड़ का करंट लगाने का काम कर रहे हैं। विभाग हर साल दो हजार करोड़ से ज्यादा की बिजली जलाते हैं, लेकिन जहां तक बिल जमा करने का सवाल है तो ज्यादातर विभाग फूटी कौड़ी नहीं देते हैं। अलग राज्य बनने के बाद से हमेशा से सरकारी विभागों पर करोड़ों का बकाया रहता है, ऐसा कभी हुआ है कि सरकारी विभागों का पूरा बिल क्लियर हो गया है। इस साल 2121 करोड़ की बिजली जलाने के बाद पहले प्रदेश सरकार से महज 385 करोड़ मिले और 1736 करोड़ का बकाया था। रियल टाइम्स में 18 जून को प्रमुखता से खबर के प्रकाशन के बाद पंचायत विभाग के बजट से प्रदेश सरकार से 750 करोड़ मिले हैं। इधर अब भी जहां बाकी सरकारी विभागों पर पिछले साल का हजार करोड़ से ज्यादा का बकाया है, वहीं नए सत्र में भी पांच सौ करोड़ से ज्यादा का बकाया हो गया है।
प्रदेशभर के सरकारी विभाग राज्य बनने के बाद से ही बेलगाम है। बरसों से विभाग बिजली जलाने के बाद बिल ही जमा नहीं करते हैं। इनमें नगरीय निकाय विभाग पहले नंबर पर है। इन पर हमेशा से ही करोड़ का बकाया रहता है, आम जनता से जुड़े विभाग होने के कारण इनकी बिजली कभी कट नहीं होती है। इसी तरह से स्वास्थ्य विभाग में अस्पतालों का बिजली बिल जमा नहीं होता है। पुलिस थाने भी कभी बिल जमा नहीं करते हैं। ऐसा कोई भी सरकारी विभाग नहीं जिस पर बकाया न हो। कुछ विभाग पैसा जमा करते हैं, पर वाे भी कभी कभार किए जाते हैं।
सरकार से लगानी पड़ती है गुहार
प्रदेश में आम उपभोक्ता पर थोड़ा सा बकाया होने पर उनकी बिजली कट करने पॉवर कंपनी के कर्मचारी पहुंच जाते हैं। वहीं सरकारी विभागों की बिजली कभी कट नहीं की जाती है। यही वजह है कि सरकारी विभाग हमेशा से बेलगाम रहे हैं। ये बिल ही जमा नहीं करते। अंत में पावर कंपनी को प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर बजट में विभागीय बजट से ही बिलों का भुगतान लेना पड़ता है।
जलाई 2121 करोड़ की बिजली
प्रदेश के सरकारी विभागों ने 2022-23 में अप्रैल से लेकर मार्च तक 2121 करोड़ की बिजली जलाई है। इसमें से पहले राज्य सरकार से 385 करोड़ मिले हैं। इसके बाद भी विभागों पर 1736 करोड़ का बकाया था। इस बकाया के लिए पॉवर कंपनी ने राज्य सरकार को मांग पत्र भेजा तो वहां से अभी पंचायत विभाग के बजट से 750 करोड़ काटकर दिए गए हैं। बाकी विभागों से अभी कोई भुगतान नहीं मिला है।
इन पर कम बकाया
जहां एक तरफ सबसे ज्यादा बकाया वाले विभाग हैं, वहीं कुछ ऐेसे विभाग भी हैं, जिन पर बकाया कम है। ऐसे विभागों में सबसे कम बकाया विधि-विधायी विभाग पर 1 करोड़ 60 लाख रुपए है। इसके बाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विभाग पर 1 करोड़ 15 लाख का बकाया है। अन्य विभागों में उच्च शिक्षा पर 1 करोड़ 10 लाख, ग्रामोद्योग पर 78 लाख, सहकारिता विभाग पर 65 लाख के साथ ही कई विभागों पर एक से 25 लाख तक का बकाया है।
ये हैं बड़े बकायेदार
नगरीय निकाय एवं विकास विभाग 500 करोड़ से ज्यादा
स्कूल शिक्षा विभाग 75 करोड़
चिकित्सा विभाग 65 करोड़
पुलिस विभाग 35 करोड़
जल संसाधन विभाग 25 करोड़
आवास एवं पर्यावरण 15 करोड़
महिला एवं बाल विकास 17 करोड़
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन 12 करोड़



