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राष्ट्रपति ने ‘बस्तर पण्डुम 2026’ का किया शुभारंभ,मां दंतेश्वरी के जयकारे लगाकर किया संबोधित

रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को जगदलपुर में कहा कि बस्तर की संस्कृति प्राचीन, समृद्ध और सबसे मीठी’ है। वे यहां लाल बाग मैदान में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक उत्सव ‘बस्तर पण्डुम 2026’ के संभाग स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ करने के बाद समारोह को संबोधित कर रही थीं।

राष्ट्रपति मुर्मू ने समारोह में मां दंतेश्वरी का जयकारा लगाकर अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने बस्तर की संस्कृति को प्राचीन, समृद्ध और “सबसे मीठी” बताते हुए वहां की परंपराओं और विरासत के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। इसके पहले उन्होंने सुबह 10.55 से 11.10 बजे तक वह बस्तर पण्डुम में लगाए गए स्टॉल्स का अवलोकन किया।

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर (बस्तर) में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक उत्सव ‘बस्तर पंडुम-2026’ का भव्य शुभारंभ करते हुए राष्ट्रपति ने बस्तर की जीवंत परंपराओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ आना उन्हें हमेशा अपने घर आने जैसा सुखद अनुभव देता है। उन्होंने कहा कि बस्तर पडुंम को लोग उत्सव की तरह जीते हैं। यहां की सुंदरता और संस्कृति पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार दशक से नक्सलवाद के कारण बस्तर के आदिवासियों को नुकसान हुआ। लेकिन अब बस्तर नक्सल मुक्त हो रहा है। बड़ी संख्या में नक्सली हथियार डाल रहे हैं। उन्होंने कहा, हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों का स्वागत करती हूं, जो लोग बरगला रहे हैं उनकी बातों में न आएं।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि बस्तर पंडुम में उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। मुझे मां दंतेश्वरी के क्षेत्र में आने का अवसर मिला। इसे मैं अपना सौभाग्य मानती हूं। मैं यहां पर आए लोगों का स्वागत करती हूं। मुझे लगता है कि 5 हजार से ज्यादा बच्चियों ने समारोह में हमारा स्वागत किया, उनकी मैं आभारी हूं। यहां की संस्कृति की भव्यता मुझे दिखाई देती है। मैं जब भी छत्तीसगढ़ आती हूं तो मुझे लगता है कि मैं अपने घर आई हूं। यहां से जो मुझे स्नेह मिलता है, वो अनुपम हैं।

ये वो धरती है जहां के वीरों ने अपने प्राण न्योछावर करके इसे बचाया है। बस्तर की देवी मां दंतेश्वरी ने इसे अपने हाथों से बनाया है। मुझे यहां का आतिथ्य और संस्कृति देखने को मिली।

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