यूनिफाइड पेंशन स्कीम पर खड़गे का तीखा हमला: ‘U’ का मतलब है मोदी सरकार का यू-टर्न

नई दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार की नई यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को लेकर कड़ा हमला बोला है। रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए खड़गे ने कहा कि UPS में ‘U’ का मतलब मोदी सरकार का यू-टर्न है। उन्होंने इस पोस्ट में यह भी दावा किया कि लोकसभा चुनाव के परिणामों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अहंकार पर लगाम लगाई है, और जनता की ताकत ने उन्हें झुकने पर मजबूर किया है।
सरकार की नीतियों पर खड़गे का हमला
खड़गे ने अपने पोस्ट में यह आरोप लगाया कि सरकार ने पहले भी कई फैसलों पर यू-टर्न लिया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार ने बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन और इंडेक्सेशन के फैसले को वापस लिया था। इसके बाद ब्रॉडकास्टिंग बिल और UPSC में लैटरल एंट्री के फैसले को भी बदल दिया गया। खड़गे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और 140 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा के लिए लड़ती रहेगी।
UPS बनाम NPS: क्या है नया पेंशन प्लान?
शनिवार को केंद्र सरकार ने नई पेंशन स्कीम (NPS) की जगह यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) लाने की घोषणा की। UPS 1 अप्रैल 2025 से लागू होगी और इससे 23 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को फायदा होगा। UPS के तहत कर्मचारियों को निश्चित पेंशन की गारंटी दी जाएगी, जबकि NPS में पेंशन की राशि बाजार की स्थिति पर निर्भर करती थी। इस नई योजना को लेकर कर्मचारियों के बीच उत्सुकता और सवाल भी बढ़ गए हैं।
विपक्ष के बयान: UPS पर सवाल और चिंताएं
AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने UPS को लेकर कहा कि बीजेपी अब अपने फैसलों पर पुनर्विचार कर रही है, और जल्द ही अग्निवीर योजना जैसे अन्य विवादित फैसले भी वापस लिए जा सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को दबाव में रखने की कोशिश कर रही थी, लेकिन विपक्ष की बात अब सही साबित हो रही है।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने भी UPS को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह फैसला पहले ही लिया जाना चाहिए था, और सरकार ने यह कदम दबाव में उठाया है। शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता आनंद दुबे ने आरोप लगाया कि सरकार ने विपक्ष के दबाव के चलते UPS को लागू किया है, और इस फैसले से कर्मचारियों को राहत मिलेगी।
UPS और NPS के बीच अंतर: जानिए क्या है बदलाव?
पूर्व कैबिनेट सचिव टी वी सोमनाथन ने UPS और NPS के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि UPS एक कॉन्ट्रिब्यूटरी फंडेड स्कीम है, जिसमें कर्मचारियों को अपनी सैलरी का 10% योगदान देना होगा। वहीं, पुरानी पेंशन योजना (OPS) एक अनफंडेड स्कीम थी, जिसमें कर्मचारियों को कोई योगदान नहीं देना पड़ता था। हालांकि, UPS में NPS के विपरीत, पेंशन राशि बाजार पर निर्भर नहीं होगी, बल्कि यह निश्चित होगी, जिससे कर्मचारियों को भविष्य में आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।
केंद्र सरकार की UPS योजना पर विवाद जारी है, और इसे लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। UPS के लागू होने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि इससे कर्मचारियों और देश की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।



