मौसम के बदले मिजाज से बिजली की खपत में 46 सौ मेगावाट का करंट

एसी, कूलर के साथ चलने लगे कृषि पंप भी
रायपुर(realtimes) मौसम के बदले मिजाज के कारण मानसून में बिजली की खपत 46 सौ मेगावाट के पार पहुंच गई है। यही स्थिति रही तो यह खपत पिछले साल की तरह पांच हजार मेगावाट के भी पार जा सकती है। ज्यादा खपत होने से परेशानी नहीं है क्योंकि सेंट्रल सेक्टर से साढ़े तीन हजार मेगावाट का शेयर होने के कारण आसानी से बिजली मिल रही है। अपना उत्पादन 22 सौ मेगावाट के आस-पास हो रहा है। कोयला गिला होने के कारण भी उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
मानसून में लगातार बारिश होने के कारण बिजली की खपत 36 से 37 सौ मेगावाट तक पहुंच गई थी। लेकिन पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में कई स्थानों में बारिश न होने के कारण खपत में इजाफा हो गया है। बारिश न होने की वजह से उमस होने लगी है, इसके कारण जो एसी और कूलर कम चलने लगे थे वो फिर से ज्यादा चलने लगे हैं। इसी के साथ प्रदेश में कई स्थानों पर कम बारिश होने के कारण कृषि पंप भी चलने लगे हैं। कृषि पंपों के बंद होने से 600 मेगावाट बिजली बच रही थी। हालांकि इस समय पंपों पर पूरे 600 मेगावाट की खपत नहीं हो रही है, लेकिन करीब आधी खपत होने लगी है। इसी के साथ एसी और कूलरों पर करीब सात सौ मेगावाट खपत होने से खपत 46 मेगावाट के पार जा रही है।
भरपूर बिजली
खपत बढ़ने के बाद भी बिजली की कोई कमी नहीं है। पॉवर वितरण कंपनी के एमडी मनोज खरे के मुताबिक इस समय खपत जितनी बिजली आसानी से मिल जा रही है। उत्पादन कंपनी के एमडी एनके बिजौरा के मुताबिक अपना उत्पादन इस समय करीब 22 सौ मेगावाट हो रहा है। पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी ताप संयंत्र में 250 मेगावाट की एक यूनिट को रखरखाव के कारण बंद किया गया है। कोयला गिला आने के कारण संयंत्रों में कोयले की खपत ज्यादा हो रही है। इससे उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। बिजली की पूर्ति करने के लिए अपने उत्पादन के बाद बाकी बिजली सेंट्रल सेक्टर से ले रहे हैं।



