
उन्होंने कहा कि पिछले 70 सालों से सरकारी स्कूलों में फ्री में शिक्षा मिलती आई है, अस्पतालों में फ्री की दवाई मिलती आई है, फ्री राशन हर महीने भेजा जा रहा है तो फिर अचानक इन सारी चीजों का विरोध क्यों हो रहा है। केंद्र सरकार की आर्थिक हालत ठीक तो है?
2014 में सरकार का 20 लाख करोड़ का बजट था, आज 40 लाख करोड़ का बजट है। अपने अमीर दोस्तों के 10 लाख करोड़ के कर्जे माफ किए हैं। आखिर क्यों? यह सब नहीं होता तो खाने की चीजों पर टैक्स नहीं लगाने पड़ते, सेना के पैसे में कटौती नहीं होती। बड़ी-बड़ी कंपनियों का 5 लाख करोड़ टैक्स भी माफ किया है, लेकिन गरीब पर लगा दिया। आम नागरिक ठगा महसूस कर रहा है।



