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मानहानि केस में राहुल गांधी को गुजरात HC से राहत नहीं

नई दिल्ली. कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से मानहानि केस में दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर मंगलवार (2 मई) को गुजरात हाई कोर्ट में सुनवाई हुई. कोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत से इनकार करते हुए दोषसिद्धि पर रोक लगाने की उनकी याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट ने कहा कि मामले की अंतिम सुनवाई पूरी होने के बाद ही अंतिम फैसला देना उचित होगा. जस्टिस हेमंत प्रच्छक ने साफ किया कि सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लेंगे. छुट्टी के दौरान कोर्ट फैसला लिखेगी. 

सूरत जिले की एक कोर्ट ने मोदी सरनेम मामले में दायर किए गए आपराधिक मानहानि के एक मामले में दोषी पाते हुए राहुल गांधी को दो साल की सजा सुनाई थी. जिसके बाद उनको संसद की सदस्यता से अयोग्य किया गया था. जस्टिस हेमंत एम. प्रच्छक की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता निरुपम नानावटी पेश हुए. उन्होंने कहा कि अपराधों की गंभीरता, सजा इस स्तर पर नहीं देखी जानी चाहिए. उनकी (राहुल गांधी) अयोग्यता कानून के तहत हुई है. इस बीच, जज ने एक आदेश पारित किया जिसमें ट्रायल कोर्ट को उनके सामने मूल रिकॉर्ड और मामले की कार्यवाही पेश करने का निर्देश दिया गया. 

अभिषेक मनु सिंघवी ने रखा पक्ष
राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि यह पहला मामला है जब मैंने देखा है कि आपराधिक मानहानि के लिए अधिकतम सजा दी गई है. यहां मुझसे ज्यादा अनुभव वाले कई वकील हैं. मुझे संदेह है कि उन्होंने भी इस तरह की सजा के बारे में सुना होगा.

सिंघवी ने कहा कि कोई सबूत उपलब्ध नहीं है. जहां तक गवाह याजी का संबंध है, वे कई वर्षों से भाजपा के सदस्य हैं. उनकी गवाही राहुल गांधी को दोषी ठहराने का एकमात्र सबूत नहीं हो सकती. उसके सबूत को रिकॉर्ड पर मौजूद अन्य सबूत से पुष्ट किया जाना है.

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