बिजली उपभोक्ताओं काे नहीं लगेगा एफपीपीएएस के नए फार्मूले में बड़ा झटका  - realtimes
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बिजली उपभोक्ताओं काे नहीं लगेगा एफपीपीएएस के नए फार्मूले में बड़ा झटका 

रायपुर(realtimes) छत्तीसगढ़ के 61 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ताओं काे अब वीसीए से स्थान पर लाए गए नए फार्मूले में महंगी बिजली का बड़ा झटका नहीं लगेगा। वीसीए में ताे पिछले साल 1.10 रुपए प्रति .यूनिट का बड़ा झटका लगा था, लेकिन अब ऐसा होने वाला नहीं है।

छत्तीसगढ़ में पहले टैरिफ में इजाफा नहीं किया गया, इसके बाद अब वीसीए के स्थान पर लाया गया एफपीपीएएस का नया फार्मूला भी राहत देना वाला है। बिजली उपभोक्ताओं से लिया जाने वाला वीसीए अब बंद कर दिया गया है। केंद्रीय सरकार के निर्देश पर छत्तीसगढ़ राज्य बिजली नियामक आयोग ने अब उत्पादन लागत के अंतर की राशि को उपभोक्ताओं से वसूलने के लिए नया फार्मूला फ्यूल पॉवर पर्चेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) लागू कर दिया है। नए फार्मूले के हिसाब से ऊर्जा प्रभार में प्रतिशत के हिसाब से शुल्क लिया जाएगा। इसमें भी एक बाध्यता यह है कि पांच फीसदी से शुल्क ज्यादा होने पर ज्यादा प्रतिशत का 95 फीसदी ही शुल्क तय किया जाएगा।

वीसीए नहीं था युक्तिसंगत

प्रदेश का बिजली नियामक आयोग हर साल जो टैरिफ तय करता है, उसके अलावा बिजली की उत्पादन लागत ज्यादा होने पर उसको उपभोक्ताओं से लेने के लिए अब तक वीसीए शुल्क लिया जाता रहा है, लेकिन इस शुल्क में एक सबसे बड़ी समस्या यह रही है कि वीसीए का शुल्क जहां दो माह का एक साथ तय होता था, वहीं यह चार माह पुराना भी रहता था, कुल मिलाकर वीसीए युक्तिसंगत नहीं था, लेकिन अब एफपीपीएएस में ऐसा नहीं होगा। इसमें एक माह पहले वाले महीने की खपत पर ही शुल्क लगेगा। जैसा कि पहले ही माह से किया जा रहा है। एफपीपीएएस अप्रैल से लागू हो रहा है। अप्रैल में उपभोक्ताओं ने जो खपत की है, उसी खपत पर मई के बिल में भी एफपीपीएएस लिया जाएगा। यह इस माह पांच फीसदी के आसपास होगा।

मिलेगी बड़ी राहत

एफपीपीएएस में यह भी तय किया गया है कि अगर बिजली खरीदी में तय उत्पादन लागत से ज्यादा खर्च होता है तो उसका प्रतिशत निकालकर ऊर्जा प्रभार यानी टैरिफ के हिसाब से शुल्क लिया जाएगा। नियम के मुताबिक अगर उत्पादन लागत पांच फीसदी से ज्यादा निकलती है ताे ऐसे में ज्यादा फीसदी का 95 प्रतिशत तय करके शुल्क लिया जाएगा। मान लो, किसी माह दस फीसदी का अंतर आता है तो उपभोक्ताओं से दस के स्थान पर साढ़े नौ फीसदी शुल्क लिया जाएगा। आधा फीसदी शुल्क नए साल के टैरिफ में समायोजित होगा।

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